आरटीआई बना आम आदमी का हथियार
पूर्वोत्तर दिल्ली की एक मलिन बस्ती में रहने वाला हारुन गुर्दा रोग के इलाज के लिए एक वर्ष तक गुरु तेग बहादुर अस्पताल का चक्कर लगा रहा था लेकिन चिकित्सक कुछ न कुछ बहाना बनाकर उसे टाल रहे थे, अंत में उसने आरटीआई का सहारा लिया, जिससे उसका इलाज संभव हुआ।
ऐसी घटनाओं से ही इस बात की पुष्टि होती है कि गत चार वर्षो में आरटीआई अब आम आदमी का हथियार बन चुका है।
हारून को आरटीआई के बारे में जानकारी देने वाली गैर सरकारी संगठन 'पारदर्शिता' से जुड़े राजीव शर्मा ने कहा कि जब हारुन अस्पताल गया तो चिकित्सकों ने उसे घर वापस भेज दिया था लेकिन आरटीआई के जरिए उसका इलाज संभव हुआ।
उल्लेखनीय है कि आगामी 12 अक्टूबर को देश में आरटीआई लागू होने के चार वर्ष पूरे हो जाएंगे।
मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने आईएएनएस से कहा, "कई सफल कहानियां आ चुकी हैं लेकिन अभी हमें लंबी यात्रा तय करनी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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