रावलपिंडी में सेना मुख्यालय पर हमला, 11 मरे (लीड-5)
देशभर को स्तब्ध कर देने वाले हमले और करीब 50 मिनट के संघर्ष के बाद सेना ने कहा कि इस संघर्ष में चार सैनिकों की मौत हो गई तथा अत्याधिक सुरक्षा वाले परिसर में दाखिल होने की कोशिश करने वाले छह आतंकवादियों में से चार मारे गए। कार्रवाई में पांच सैनिक घायल भी हो गए।
सुजुकी वाहन में सवार होकर आए सेना की वर्दी पहने कुछ आतंकवादियों ने सबसे पहले सुरक्षा बलों की एक चौकी पर गोलीबारी कर सभी सैनिकों को या तो मार डाला या फिर घायल कर दिया। उसके बाद हमलावर इमारत के नजदीक स्थित दूसरी चौकी की ओर बढ़ गए।
रोके जाने पर आतंकवादी उसी समय वाहन से बाहर निकल आए और स्वचालित हथियारों से गोलियां बरसाने लगे तथा ग्रेनेड फेंकने लगे।
पूरे इलाके में दहशत फैल गई। सेना के जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी और चार आतंकवादियों को मार गिराया। लेकिन उनमें से दो आतंकवादी बच निकले। इस संघर्ष में एक राहगीर भी मारा गया।
खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि कम से कम दो आतंकवादी मुख्यालय परिसर में दाखिल होने में कामयाब रहे और उन्होंने दो सैन्य अधिकारियों को बंधक बना लिया था। दूसरी ओर सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अतहर अब्बास ने इससे इंकार किया है।
अब्बास ने कहा, "दो आतंकवादी बच निकलने में कामयाब रहे लेकिन हम आश्वस्त हैं कि वे यहां छुपे नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि सेना ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और दो आतंकवादियों को गिरफ्तार करने के लिए तलाशी अभियान जारी है।
इससे पहले अब्बास ने बताया था कि हालात पूरी तरह काबू में हैं। परिसर में दाखिल होने की कोशिश करने वाले सभी आतंकवादी मारे जा चुके हैं।
खुद को तहरीक-ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी)का प्रवक्ता बताने वाले एक शख्स ने जियो टीवी से फोन पर संपर्क कर इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
यह हमला पेशावर पर हुए आत्मघाती हमले के एक दिन बाद हुआ है, जिसमें मरने वालों की संख्या अब तक 52 पहुंच चुकी है।
'जियो टीवी' ने मंसूर अहमद नाम के प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से बताया कि हमलावरों ने वाहन से सुरक्षाकर्मियों पर गोलियां बरसाईं। वे बार-बार ग्रेनेड दाग रहे थे। अहमद ने बताया कि कम से कम एक हमलावर तो चंद मिनटों में ही मारा गया। उसका शव सड़क पर पड़ा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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