त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज में प्रवेश को सर्वोच्च न्यायालय की हरी झंडी
त्रिपुरा के स्वास्थ्य मंत्री तपन चक्रबर्ती ने बताया कि प्रधान न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन और न्यायाधीश बी.एन. अग्रवाल की खंडपीठ ने शुक्रवार को त्रिपुरा चिकित्सा महाविद्यालय और बी. आर. आंबेडकर शिक्षण अस्पताल में छात्रों को दाखिला देने की विशेष अनुमति दी।
चक्रबर्ती ने पत्रकारों को बताया कि केरल स्थित ग्लोबल एजुकेशन नेट ने राज्य सरकार के सहयोग से वर्ष 2004 में पीपीपी मॉडल पर देश का पहला चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित किया।
ग्लोबल एजुकेशन नेट की शर्तो को पूरा करने में विफल रहने और संस्थान को चलाने में असमर्थता जताने के बाद त्रिपुरा सरकार ने इस वर्ष मई में सभी पट्टों और समझौतों को रद्द कर दिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने चिकित्सा महाविद्यालय के भविष्य के प्रति सभी संदेहों को दूर कर दिया। कॉलेज में 500 बिस्तरों का एक अस्पताल भी है।
एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है कि चिकित्सा महाविद्यालय का संचालन करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक 11 सदस्यीय समिति का गठन किया गया।
छात्रों के प्रवेश के लिए जुलाई की तय सीमा गुजरने के बाद समिति ने सर्वोच्च न्यायालय से आग्रह कर भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) को महाविद्यालय का दौरा करने को कहने और छात्रों के दाखिले की अनुमति देने को कहा।
एमसीआई के दल ने 25-26 अगस्त को महाविद्यालय का दौरा किया और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय को एक रिपोर्ट सौंपी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications