चीन की एक सप्ताह की यात्रा पर जाएंगे प्रचंड
प्रचंड की यह यात्र ऐसे वक्त में हो रही है जब नेपाल में उनकी पार्टी ने करीब चार महीनों से संसद को ठप कर रखा है। नेपाल सरकार और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की अपील के बावजूद प्रंचड की माओवादी पार्टी ने बाल सिपाहियों को रिहा करने से इनकार कर दिया है।
प्रधानमंत्री के रूप में अगस्त 2008 में की गई बीजिंग यात्रा के बाद यह प्रचंड की दूसरी चीन यात्रा है। इस यात्रा में माओवादी सांसद और पार्टी की विदेशी मामलों की समिति के मुखिया कृष्ण बहादुर महारा और प्रचंड के सहयोगी मोहन वैद्य किरण भी उनके साथ होंगे।
वर्तमान में माओवादियों ने संसद को ठप रखने के साथ ही संयुक्त राष्ट्र व यूरोपीय संघ की सत्तारुढ़ दल व पूर्व छापामारों के बीच सुलह-समझौता की अपील को खारिज कर दिया है।
यह यात्रा तब हो रही है जबकि पार्टी ने अपने नेताओं की विदेश यात्रा पर रोक लगा रखी है। पार्टी ने घोषणा की थी कि उसके सदस्य तब तक विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे जब तक कि पार्टी नेतृत्व से उन्हें इसकी अनुमति न मिले।
प्रचंड की अचानक चीन यात्रा की वजह ज्ञात नहीं हो सकी है।
महारा का कहना है कि दोनों देशों और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी व माओवादियों के बीच संबंधों को मजबूती देने के मकसद से यह यात्रा की जा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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