जिनको नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए था उनमें गांधी शीर्ष पर
अरुण कुमार
वाशिंगटन, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रतिष्ठित पत्रिका 'फॉरेन पालिसी' के अनुसार जिन सात लोगों को अब तक नोबेल पुरस्कार नहीं मिला है लेकिन उनको इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिए था, उनमें महात्मा गांधी शीर्ष पर हैं।
नोबेल पुरस्कार के लिए हेनरी किसिजर और यासिर आराफात तक के चयन के नोबेल समिति के विवादास्पद निर्णयों का उल्लेख करते हुए पत्रिका ने इलियानोर रुजवेल्ट, वाक्लाव हावेल, केन सरो-वीवा, सेरी नूसियाबेह, कोराजिन एक्विनो और लियु जियाबाओ को नोबेल पुरस्कार से वंचित अन्य छह लोगों में शामिल किया है।
नोबेल पुरस्कार के लिए गांधीजी का नाम वर्ष 1937, 1947 और उनकी मौत के बाद 1948 में अंतिम सूची में शामिल किया गया था।
वर्ष 1937 में नोबेल समिति के सलाहकार ने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में एक शांति कार्यकर्ता और राजनीतिक नेता की गांधीजी की दोहरी भूमिका की आलोचना करते हुए लिखा, "वह एक महात्मा हैं लेकिन अक्सर अचानक ही एक आम राजनेता बन जाते हैं।"
जब भारत और पाकिस्तान को स्वतंत्रता हासिल हुई तो विभाजन से भड़की हिंसा और अस्थिरता गांधीजी को नोबेल शांति पुरस्कार की राह में बाधा बन गई।
पत्रिका ने कहा है कि वर्ष 1947 की गर्मियों में फैले तनाव के कारण नोबेल पुरस्कार समिति ऐसे व्यक्ति को सम्मानित करने में हिचक गई, जो संघर्षरत पक्षों में से एक के साथ जुड़ा है।
नोबेल समिति पर पहले भी पक्षपात और नस्लीय भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं। अधिकांश नोबेल पुरस्कार यूरोपीय श्वेत व्यक्तियों को ही दिए गए हैं।
नोबेल समिति ने वर्ष 1948 में गांधीजी की मौत के बाद उनका नाम नोबेल पुरस्कार के लिए स्वीकार कर लिया था। परंतु अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में स्पष्ट था कि पुरस्कार किसी जीवित व्यक्ति को ही दिया जाएगा।
बहरहाल किसी उपयुक्त जीवित व्यक्ति के नहीं पाए जाने के बाद उस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार किसी को नहीं दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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