भारत को आधुनिक सैन्य उपकरणों की जरूरत : मंत्री (साक्षात्कार)
रितु शर्मा
लद्दाख, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। रक्षा राज्य मंत्री एम.एम. पल्लम राजू ने भारतीय सेनाओं के पुराने पड़ते उपकरणों पर चिंता जताते हुए कहा है कि उनके आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी जाएगी।
थलसेना के तोपखाने, हवाई रक्षा प्रणाली के आधुनिकीकरण दशकों से लंबित होने और नौसेना द्वारा सी हैरियर विमानों को हटाने के बारे में राजू ने कहा कि सरकार समस्या से अवगत है।
राजू ने आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, "हमें तेजी से आधुनिकीकरण करने की आवश्यकता है। आपूर्तिकर्ताओं को काली सूची डालने से हमारे लिए समस्या हो गई है।"
सेना पिछले 23 वर्षो से नई तोपों का इंतजार कर रही है। करीब 29 अरब रुपये में 140 होवित्जर तोपों के सौदे में सबसे आगे चल रही सिंगापुर टेक्न ोलॉजी को काली सूची में डाल दिए जाने से यह इंतजार और लंबा हो सकता है।
सिंगापुर टेक्न ोलॉजी 80 अरब रुपये में 155/52 मिलीमीटर की 400 तोपों की आपूर्ति और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिए देश में बनाई जाने वाली 1,100 होवित्जर तोपों के सौदे की प्रतिभागी थी।
सेना ने वर्ष 1986 में 410 बोफोर्स 155 मिलीमीटर होवित्जर तोपें खरीदीं थीं लेकिन यह सौदा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गया। सेना की एल-70 तोपें पिछले 44 वर्षो से उपयोग की जा रही हैं।
वायुसेना ने वर्ष 1974 और 1990 में पेचोर मिसाइल इकाइयां रूस से खरीदी थीं। परंतु उपकरणों के अभाव में इनमें से काफी ठप हो गई हैं।
सी हैरियर विमानों को हटाने के फैसले से नौसेना का हवाई तंत्र भी कठिनाइयों के दौर से गुजर रहा है। इन विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने की रफ्तार चिंताजनक तरीके से बढ़ी है। नौसेना में 80 के दशक में शामिल किए गए इन विमानों में से अब केवल 11 बचे हैं।
मंत्री ने स्वीकार किया कि हवाई बेड़े के पुराने होने पर समस्याएं होती हैं। सी हैरियर को हटाने की आवश्यकता है।
उल्लेखनीय है कि अरब सागर में हाल ही में सी हैरियर विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से एक पायलट की मौत हो गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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