नोबेल शांति पुरस्कार के साथ ओबामा ने फिर रचा इतिहास (राउंडअप)
इस सम्मान से गदगद ओबामा ने कहा कि उन्हें सम्मानित जरूर किया गया है लेकिन उन्हें ऐसा नहीं लगता कि इसे हासिल करने लायक पर्याप्त कुछ उन्होंने किया हो।
नोबेल समिति की ओर से ओस्लो में की गई इस घोषणा ने नई दिल्ली से नार्वे और व्हाइट हाउस तक लोगों को चकित कर दिया। राष्ट्रपति बराक ओबामा जैसे ही सुबह सोकर उठे उन्हें इस खबर के बारे में बताया गया। उनके प्रेस सचिव रॉबर्ट गिब्स ने उन्हें इसकी सूचना दी।
कुछ घंटे बाद रोज गार्डन में शुक्रवार को उपस्थित होते हुए ओबामा ने कहा कि यह पुरस्कार पाकर वह चकित और विनीत दोनों हैं।
ओबामा ने कहा, "मैं इसे अपनी उपलब्धियों के सम्मान के रूप में नहीं देखता, बल्कि इसे उस लक्ष्य के सम्मान के रूप में देखता हूं जो अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए मैंने निर्धारित किया है।"
ओबामा ने कहा, "मैं नहीं समझता कि मैं उन तमाम सुधारवादी हस्तियों के समूह में शामिल होने की योग्यता रखता हूं जिन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।"
नोबेल समिति के अनुसार परमाणु हथियार रहित विश्व का ओबामा का दृष्टिकोण विशेष अहमियत रखता है।
समिति ने अपनी वेबसाइट पर कहा है, "ओबामा ने बतौर राष्ट्रपति अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में नया माहौल बनाया है, जहां बहुराष्ट्रीय कूटनीति केंद्रीय भूमिका में है और संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य संस्थाएं भूमिका निभा सकती हैं।"
समिति की ओर से कहा गया है, "अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति को सशक्त बनाने तथा लोगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए किए गए असाधारण प्रयासों के लिए" वर्ष 2009 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ओबामा को चुना गया है।
समिति के अनुसार, "ओबामा जैसी शख्सियत वाले बहुत कम लोग होते हैं जो दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करते हैं और लोगों में सुखद भविष्य की आस जगाते हैं। उनकी कूटनीति का आधार यही है कि विश्व का नेतृत्व करने वाले लोग उन्हीं मूल्यों और विचारों को आधार बनाएं, जिन्हें दुनिया की बहुसंख्यक आबादी मानती है।"
प्रथम अफ्रीकी-अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा नवम्बर 2008 में इस पद पर निर्वाचित हुए थे।
14 लाख डॉलर की राशि वाला नोबेल पुरस्कार ओस्लो में 10 दिसम्बर को ओबामा को प्रदान किया जाएगा।
इस वर्ष के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 205 रिकार्ड नामांकन मिले थे जिनमें से 33 संस्थाओं के थे।
पिछले साल फिनलैंड के राष्ट्रपति मार्ती अहतिसारी को नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था।
इस वर्ष के चिकित्सा, भौतिकी, रसायनशास्त्र और साहित्य के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा पहले ही की जा चुकी है।
ओबामा के नाम इस पुरस्कार की घोषणा के साथ ही दुनिया भर से उन्हें बधाइयां देने का सिलसिला शुरू हो गया।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोबेल पुरस्कार पाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को अपनी हार्दिक बधाई दी है।
मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को हैदरबाद में संवाददाताओं से कहा, "मैं राष्ट्रपति ओबामा को अपनी हार्दिक बधाई देता हूं।"
इजरायल के राष्ट्रपति शिमोन पेरेज ने ओबामा को भेजे एक संदेश में कहा है, "कुछ गिने-चुने नेता ही ऐसे हैं, जिन्होंने इतने कम समय में दुनिया के स्वभाव को बदलने में सफलता पाई हो।"
इजरायल के रक्षा मंत्री एहुद बराक ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि यह पुरस्कार मध्य पूर्व में शांति स्थापना में योगदान के लिए ओबामा की क्षमता को बढ़ाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संगठन के प्रमुख टिबोर टोथ ने शुक्रवार को कहा कि शांति का नोबेल पुरस्कार अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को परमाणु नि:शस्त्रीकरण के अपने पथ पर चलने के लिए मजबूती प्रदान करेगा।
व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि संगठन (सीटीबीटीओ) के कार्यकारी सचिव टोथ ने कहा है कि ओबामा ने इस संधि को लागू कराने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता घोषित की है।
अभी तक इस संधि को लागू नहीं किया जा सका है, क्योंकि अमेरिका, इजरायल, उत्तर कोरिया, भारत और पाकिस्तान जैसे प्रमुख देशों ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
टोथ ने कहा है, "बराक ओबामा ने परमाणु नि:शस्त्रीकरण के जिस रास्ते को चुना है, वह दुरूह हो सकता है। ऐसे में नोबेल समिति द्वारा ओबामा के प्रयासों को दिया गया यह सम्मान उनके संकल्प को मजबूती प्रदान कर सकता है।"
यूरोपीय आयोग के प्रमुख ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को इस वर्ष का शांति का नोबेल पुरस्कार दिए जाने का निर्णय परमाणु मुक्त दुनिया की उनकी पहल का एक सम्मान है।
आयोग प्रमुख जोस मैनुएल बारोसो ने कहा है, "दुनिया की एक बड़ी सैन्य शक्ति के नेता राष्ट्रपति बराक ओबामा को उनके कार्यकाल की शुरुआत में ही दिया गया यह पुरस्कार उनके द्वारा एक परमाणु हथियार मुक्त दुनिया के दर्शन के साथ वैश्विक स्तर पर खड़ी की गई उम्मीदों का एक प्रतिफल है।"
बारोसो ने कहा है, "यह पुरस्कार उन सभी लोगों के प्रयासों के लिए एक प्रोत्साहन है जो एक सुरक्षित दुनिया के लिए अपना सहयोग दे सकते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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