आंध्र और कर्नाटक के बाढ़ प्रभावित 750,000 बच्चों को मदद की दरकार

सेव द चिल्ड्रन का कहना है कि यदि मदद तुरंत नहीं पहुंचाई गई तो अतिसार व जल से होने वाली अन्य बीमारियों के फैलने से लाखों बच्चों की जान को खतरा हो सकता है।

सेव द चिल्ड्रन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी थॉमस चांडी का कहना है, "आंध्र प्रदेश के पांच वर्ष से कम आयु के 13 प्रतिशत बच्चे पहले ही कुपोषित हैं। कुपोषण का उच्च स्तर बताता है कि भारत में बच्चों की मौत का मुख्य कारण रहे अतिसार और श्वसन संबंधी बीमारियों से अधिक बच्चों की मृत्यु की संभावना है।"

आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कुपोषितों के लिए काम कर रहे एक अन्य अंतर्राष्ट्रीय एनजीओ 'एक्शन एड' के रघु पी. कहते हैं, "हमारे बाढ़ बचाव दलों के मुताबिक अब भी हजारों लोग बिना भोजन और शुद्ध जल के रह रहे हैं।"

'सेव द चिल्ड्रन' के मुताबिक करीब 275,000 लोगों को अपना सब कुछ छोड़ कर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा है। दो हजार गांव पूरी तरह पानी में डूब गए हैं।

चांडी ने कहा, "भारत में हर साल पांच वर्ष से कम आयु के 350,000 बच्चों की अतिसार से मौत होती है। इस बार स्थिति और भी खराब होने का अंदेशा है। इस स्थिति से निपटने के लिए हमें कार्पोरेट हाउसों और लोगों की मदद की जरूरत है। हमें मिलने वाली किसी भी छोटी सी मदद का मतलब है कि हम एक और बच्चे को स्वस्थ व सुरक्षित कर सकते हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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