गांधीवादी नोबेल पुरस्कार विजेताओं में एक नाम और जुड़ा
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। महात्मा गांधी को शांति का नोबेल पुरस्कार भले ही नहीं मिला हो, लेकिन सत्य और अहिंसा का उनका सिद्धांत पूरी दुनिया में लोगों को प्रेरित करता रहा है और ऐसे प्रेरित कई सारे लोगों को लगातार यह पुरस्कार मिलता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी उनमें से एक हैं।
ओबामा ने अभी पिछले ही सप्ताह गांधी को अपना असली आदर्श बताया था और उन्हें अपनी हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
नोबेल विजेताओं का चयन करने वाली समिति गांधी को सम्मानित न करने के लिए माफी मांग चुकी है और उन लोगों को अक्सर इस पुरस्कार के लिए चुनती रही है जो गांधी से प्रेरित और प्रभावित रहे हैं।
जब तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा को 1989 में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था तो नोबेल समिति के चेयरमैन ने कहा था कि यह महात्मा गांधी की स्मृति को श्रद्धांजलि का एक हिस्सा है।
दलाई लामा के पहले 1964 में इस पुरस्कार से सम्मानित किए गए मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने गांधी को अपना प्रेरणास्रोत बताया था।
वर्ष 1991 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित की गईं म्यांमार की नेता आंग सान सू ची, और वर्ष 1993 में इस पुरस्कार से संयुक्त रूप से सम्मानित किए गए दक्षिण अफ्रीका के नेल्सन मंडेला और फ्रेडरिक विलियम डी क्लार्क ने भी गांधी के जीवन और उनके कार्यो से प्रेरणा पाई थी।
शुक्रवार को नोबेल विजेता इस गांधीवादी समुदाय में एक और नाम जुड़ गया है।
ओबामा ने इस बारे में चर्चा की है कि गांधी के विचार और उनकी आत्मकथा ने उन्हें कितना गहरे तक प्रभावित किया है।
दो अक्टूबर को जब पूरी दुनिया गांधी जयंती को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मना रही थी, तो उस समय ओबामा ने कहा था, "वर्ष 1959 में भारत यात्रा के दौरान मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने गांधी के आदर्शो और सीखों से जो कुछ ग्रहण किया था उसने नागरिक अधिकार आंदोलनों के जरिए अमेरिकी समाज को बदल डाला।"
ओबामा ने कहा था, "आज के अमेरिका की जड़ें महात्मा गांधी के भारत और उनके द्वारा भारत की आजादी के लिए चलाए गए अहिंसक आंदोलन में निहित हैं।"
इस बयान के ठीक एक महीना पहले ओबामा ने विद्यार्थियों के एक समूह के बीच कहा था कि यदि संभव होता तो उन्हें महात्मा गांधी के साथ रात्रि भोज में हिस्सा लेने में गर्व होता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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