महाराष्ट्र चुनावों में दखल न दे बंबई उच्च न्यायालय : सर्वोच्च न्यायालय
नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से संबद्ध बंबई उच्च न्यायालय के एक फैसले को यह कहकर खारिज कर दिया है कि निर्वाचन प्रक्रिया में 'हस्तक्षेप' पर संवैधानिक रोक चीन की महान दीवार के समान है और उसे लांघा नहीं जा सकता।
न्यायमूर्ति बी. एन. अग्रवाल और न्यायमूर्ति आफताब आलम की पीठ ने मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय का वह आदेश खारिज कर दिया जिसमें उसने निर्वाचन आयोग से एक ऐसे उम्मीदवार को चुनाव लड़ने की इजाजत देने को कहा था जिसका नामांकन पत्र वह रद्द कर चुका था।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि वह निर्वाचन आयोग की इस दलील से सहमत है कि निर्वाचन प्रक्रिया में अदालती हस्तक्षेप पर संवैधानिक रोक चीन की महान दीवार की तरह है जिसे कोई भी अदालत लांघ नहीं सकती।
निर्वाचन आयोग ने बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। बंबई उच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग से यादवराव भीमाराव सूर्यवंशी को चुनाव लड़ने की इजाजत देने को कहा था। वह पंजीकृत लेकिन गैर मान्यताप्राप्त जनसुराज्य शक्ति पार्टी की ओर से प्रत्याशी थे। उच्च न्यायालय ने आयोग को आदेश दिया था कि सूर्यवंशी का नामांकन रद्द होने के बावजूद वह 13 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनावों में उसे ओमेरगा सुरक्षित विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इजाजत दे।
ओमेरेगा निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी ने सूर्यवंशी का नामांकन इसलिए रद्द किया था क्योंकि उन्होंने अपने नाम का प्रस्ताव करने वाले अपने निर्वाचन क्षेत्र के 10 मतदाताओं में से एक का मतदाता अनुक्रमांक गलत दर्ज किया था।
नियमानुसार मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों से इतर किसी पार्टी की ओर से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को अपने नाम का प्रस्ताव उक्त निर्वाचन क्षेत्र के 10 मतदाताओं से कराना पड़ता है। नामांकन पत्र रद्द होने को सूर्यवंशी ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि नामांकन पत्र तकनीकी या लिपिकीय असंगतियों के कारणों से रद्द नहीं किए जाने चाहिए। न्यायालय ने आयोग को निर्देश दिया कि वह सूर्यवंशी का नाम मतपत्रों में शरीक करे।
निर्वाचन आयोग ने इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की जिसने उच्च न्यायालय के फैसले को खारिज कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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