जयपुर में 16 वें लोकरंग समारोह में विभिन्न प्रदेशों के लोकनृत्यों की प्रस्तुति
छत्तीसगढ़ राज्य के लोक कलाकारों ने सामूहिक रूप से 'भर्तृहरी गायन' प्रस्तुत किया। राजस्थान के दया शंकर ने 'भवाई नृत्य' और अलवर के कलाकारों ने 'भपंग' वादन के साथ 'मेवाती गायन' प्रस्तुत किया। उत्तराखंड के कलाकारों ने फसल की कटाई के समय किया जाने वाला 'हारूल नृत्य' प्रस्तुत किया।
मिजोरम के कलाकारों ने बांसों के जाल के बीच नृत्य करते हुए 'चेरो' नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को रोमांचित किया। तमिलनाडु के कलाकारों ने ढप जैसे वाद्य यंत्र के साथ 'थपट्टम' लोक नृत्य प्रस्तुत किया। जो आज का विशेष आकर्षण रहा। राजस्थान के 'कुचामणी ख्याल' लोकनाट्य को दयाराम एण्ड पार्टी ने प्रस्तुत किया। उल्लेखनीय है कि हाल ही दयाराम को लोकनाट्य के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
शुक्रवार, 9 अक्टूबर को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के सौजन्य से मध्यप्रदेश का राई नृत्य, उत्तर प्रदेश का लोकगायन, बिहार का भोजपुरी गायन, छत्तीसगढ़ का देबारी नृत्य और भर्तृहरी गायन और मध्यप्रदेश का गणगौर नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के सौजन्य से तमिलनाडु का थपट्टम, कर्नाटक का गुर वा कुनीथा, केरल का कोलकलि, आंध्रप्रदेश का बोनालु और गोवा का पुर्तगाली नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। उत्तर पूर्व सांस्कृतिक केन्द्र के सौजन्य से मिजोरम का चेरो और उत्तराखंड के लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। राजस्थान के तेरहताली लोक गायन की भी प्रस्तुति होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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