घायल होने के बावजूद आईटीबीपी जवानों ने मोर्चा नहीं छोड़ा

आईटीबीपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "जब विस्फोट हुआ तो हवलदार रवींद्र सिंह और कांस्टेबल कुलवंत सिंह दूतावास की दीवार से लगी अपनी चौकी पर तैनात थे। विस्फोट दूतावास से कुछ दूर हुआ लेकिन उसका असर इतना जबरदस्त था कि एक जवान उछलकर कुछ दूर जा गिरा। उसे पीठ में काफी चोटें आईं। दूसरे जवान को चौकी पर लगे कांच के टूटने से गले पर चोट लगी।"

आत्मघाती हमला सुबह 8.27 बजे कड़ी सुरक्षा वाली सड़क पर हुआ। इस सड़क पर भारतीय दूतावास के साथ ही अफगान आंतरिक मंत्रालय भी स्थित है।

अधिकारी के अनुसार आतंकवाद-रोधी प्रशिक्षण प्राप्त रवींद्र और कुलवंत की प्राथमिक चिकित्सा की गई। इसके बाद दोनों जवान फिर चौकी पर तैनात हो गए।

अधिकारी के अनुसार हालत की गंभीरता को देखते हुए दोनों जवानों ने मोर्चे से हटने से इंकार कर दिया।

आईटीबीपी के अधिकारी के अनुसार उनकी सभी बटालियनों से चुने गए सबसे बेहतर जवानों को काबुल में भारतीय दूतावास पर तैनात किया गया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष सात जुलाई को काबुल में भारतीय दूतावास पर हुए आत्मघाती हमले में 44 लोगों की मौत हुई थी और 147 लोग घायल हुए थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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