काबुल विस्फोट: मृतकों की संख्‍या 12 हुई

Kabul blast
काबुल/नई दिल्ली। काबुल में स्थित भारतीय दूतावास के पास गुरुवार को हुए आत्मघाती हमले में मारे गए लोगों की संख्‍या बढ़कर 12 हो गई है। इस तालिबानी हमले में करीब 90 लोग घायल हुए हैं। भारतीय दूतावास को निशाना बनाकर पिछले वर्ष भी ऐसा ही हमला किया गया था।

आत्मघाती हमले में सभी भारतीय सुरक्षित हैं। अफगानी अधिकारियों ने बताया कि विस्फोट में एक पुलिस अधिकारी और 11 अफगानी नागरिक मारे गए हैं। मृतकों में अधिकांश वे लोग थे जो भारत का वीजा लेने के लिए दूतावास आए थे।

उधर, तालिबान ने एक वेबसाइट पर बयान जारी कर दावा किया है कि यह हमला भारतीय दूतावास को निशाना बनाकर किया गया। आतंकवादी संगठन का दावा है कि विस्फोट में भारतीय दूतावास के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए हैं। आतंकवादी संगठन ने हमलावर की पहचान खालिद के रूप में की है।

दूतावास को बनाया गया निशाना

तालिबान ने कहा, "हमला दूतावास की इमारत को निशाना बनाकर किया गया था और शक्तिशाली धमाके में उसे क्षति पहुंची है।" बयान में कहा गया है कि विस्फोट में आंतरिक मंत्रालय की इमारत को भी नुकसान पहुंचा।

आत्मघाती हमला काबुल के सुरक्षित माने जाने वाले इलाके में सुबह लगभग 8.27 बजे हुआ, जहां भारतीय दूतावास के अलावा अफगान आंतरिक मंत्रालय की इमारते हैं। विस्फोट में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के तीन जवान मामूली रूप से घायल हो गए। तीनों जवान दूतावास के बाहर तैनात थे। विस्फोट में भारतीय दूतावास की बाहरी दीवार क्षतिग्रस्त हो गई और खिड़कियों के शीशे चटक गए।

कार में लाया गया विस्‍फोटक पदार्थ

अफगानी आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता जिमाराई बाशारे ने इस बात की पुष्टि की है कि विस्फोट कार में सवार एक आत्मघाती हमलावर ने किया था। भारत के अलावा अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई और अमेरिका ने भी इस हमले की निंदा की है।

अफगानिस्तान में भारत के राजदूत जयंत प्रसाद ने बताया, "हमले में कोई भी भारतीय गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ और न ही किसी भारतीय की मौत हुई।" उन्होंने कहा कि दूतावास के सभी कर्मी सुरक्षित हैं।

प्रसाद ने विस्फोट की तुलना सात जुलाई 2008 को हुए धमाके से की, जिसमें दो भारतीय राजनयिकों सहित 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने एक निजी समाचार चैनल से कहा, "मैंने अपने आवास से विस्फोट की जो आवाजें सुनी, वह जुलाई 2008 की ही तरह थी। "

इस बीच, नई दिल्ली में विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा कि यह विस्फोट पिछले साल सात जुलाई को हुए धमाके की तरह ही था, जिसमें दो भारतीय राजनयिक मारे गए थे। उन्होंने कहा कि पिछले साल हमले के बाद जो कदम उठाए गए वह 'प्रभावशाली' साबित हुए।

भारत विरोधी तत्‍वों का हाथ होने की आशंका

राव ने कहा कि विस्फोटकों से लदी एक कार दूतावास की दीवार तक पहुंची और फिर उसमें धमाका किया गया। तालिबान द्वारा इस हमले की जिम्मेदारी लेने से पहले ही भारतीय अधिकारी ने कहा, "इस हमले के पीछे उन लोगों का हाथ है जो नहीं चाहते कि भारत पुनर्निर्माण की उन गतिविधियों में हाथ बंटाए, जिनसे अफगान नागरिक संतुष्ट हैं।"

राष्ट्रपति करजई ने इसे 'निर्दोषों के खिलाफ आतंकवादी कार्रवाई' करार दिया। नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर ने भी इस हमले की निंदा करते हुए गहरी चिंता जाहिर की। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "हम भारत और आतंकवाद से पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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