सामाजिक उद्देश्य को फिर से परिभाषित करने की जरूरत : अंसारी
आज यहां 'असुरक्षा और राज्य- उभरती चुनौतियां' विषय पर 14वें फील्ड मार्शल क़े एम़ करियप्पा स्मारक भाषण देते हुए उन्होंने कहा कि नागिरकों और नागरिक समाज का दायित्व है कि वे राज्य को उसके उद्देश्य से जोड़े रखें। हमारे मामले में यह संविधान की भूमिका में अंकित है। इससे अवधारणा स्तर पर यह जरूरी हो जाता है कि सामाजिक उद्देश्य को पुन: परिभाषित किया जाए, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक नागरिक के लिए भूख से मुक्ति सुनिश्चित की जा सके ताकि वह एक नागरिक को उपलब्ध अन्य सभी गतिविधियों में भाग ले सके।
राष्ट्रीय और विश्व स्तर पर इस प्रकार के प्रयास से ऐसा नया विश्व तैयार करने में सहायता मिलेगी जो मानवाधिकारों और पर्यावरण के अनुरूप अधिक टिकाऊ बन सकेगा। इस का मूलाधार व्यावहारिक आवश्यकता होगी और अव्यावहारिक आदर्शवादिता की तुलना में जीवित रहने के लिए जरूरी होगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले तीन दशकों में हमारे सामने परम्परागत और गैर-परम्परागत खतरों के सर्वेक्षण ने व्यापक सुरक्षा के प्रति नया ²ष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है, जिसके बारे में आंकड़े सार्वजनिक क्षेत्र में हैं। यह एक जटिल चित्र प्रस्तुत करता है, यह हमारे संसाधनों के आवंटन और उनके उपयोग में कई असंतुलनों की ओर भी इशारा करता है। यह सामाजिक संरचनाओं और सुरक्षा ढांचे में क्षमता निर्माण तथा गुणात्मक उन्नयन और परिमाणात्मक पुनर्गठन पर आधारित व्याख्या को ठीक करने की आवश्यकता जताता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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