पानी की कमी से बढ़ेंगी वैश्विक सुरक्षा की चिंताएं : पचौरी (लीड-1)
वर्ष 2007 में शांति के नोबल शांति पुरस्कार से संयुक्त रूप से सम्मानित इस संस्था के अध्यक्ष पचौरी ने मंगलवार को कहा, "दुनिया का पानी दुनिया की दौलत की तरह है। इसके लिए वैश्विक स्तर पर अपेक्षा से अधिक काम करने की आवश्यकता है। परेशानी यह है कि कुछ देश अन्य देशों की अपेक्षा अधिक पानी का उपभोग कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "शुद्ध पानी के 31 प्रतिशत स्रोतों के साथ लातिन अमेरिका में प्रत्येक व्यक्ति दक्षिण एशिया के लोगों की अपेक्षा 12 गुना अधिक पानी का उपभोग करता है। ब्राजील और कनाडा के पास उनकी आवश्यकता से अधिक जल है। अन्य देश जैसे मध्य एशिया के राष्ट्रों के पास उनकी आवश्यकता से बहुत कम पानी है।"
एक वक्तव्य के मुताबिक पचौरी ने सेंट पीटर में स्थित गस्टावुस एडोल्फस कॉलेज में नोबल सम्मेलन 2009 में कहा, "साल 2020 तक 1.2 अरब एशियाइयों, 25 करोड़ अफ्रीकियों, 8.1 लाख लातिन अमेरिकियों पर पानी की कमी का दबाव बढ़ जाएगा।"
पानी की कमी से लोगों में स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियां हो सकती हैं।
पचौरी ने कहा, "जलवायु परिवर्तन के परिणामस्वरूप होने वाली पानी व भोजन की कमी के चलते लोगों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियां हो सकती हैं।"
उनका कहना है कि जब पानी के स्रोतों के लिए विभिन्न समुदाय आपस में लड़ेंगे तो शांति व सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो जाएगा।
उन्होंने कहा, "साल 2015 तक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम हो जाना चाहिए। यदि हम ऐसा कर पाते हैं तो जलवायु परिवर्तन से होने वाले सबसे बुरे प्रभावों से बच सकेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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