मेरे गांव दौरे को मीडिया ने दलित रंग दिया : राहुल (लीड-1)
राहुल ने यहां संवाददाताओं से चर्चा में कहा, "मैं जब किसी के घर जाता हूं तो यह नहीं देखता कि वह उच्च जाति का है या फिर निचली जाति का। मैं हर इंसान को एक ही नजरिए से देखता हूं। मैं गरीबों के घर जाता हूं वह चाहे दलित हो या मुसलमान।"
उन्होंने कहा कि वह जब गांवों में गरीबों के घर जाते हैं मीडिया उसे दलितों से जोड़ कर प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा, "मैं किसी दलित के घर नहीं बल्कि एक गरीब के घर जाता हूं। यह भेदभाव मीडिया करता है। मेरे मन में ऐसे भाव नहीं है। मैं निजी तौर जाति व्यवस्था में विश्वास नहीं करता। गरीबों और अमीरों के बीच मैं एक ही अंतर देख पाता हूं और वह है 'अवसर'।"
राहुल ने कहा, "मेरे दौरों को दलित रंग देना मेरी नहीं बल्कि मीडिया की उपज है।"
राहुल ने उन आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जाता रहा है कि वातानुकूलित कमरों में बैठकर उनके जैसे युवा नेता गरीबों को खुद से जोड़ने की कोशिशें करते हैं।
उन्होंने उत्तर प्रदेश का हवाला देते हुए कहा, "मैं अपने कार्यालय से राज्य के सबसे गरीब गांव का पता लगाने और उस गांव के सबसे गरीब व्यक्ति के घर ले जाने को कहता हूं। गरीब तेज होते हैं लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिलता।"
देश भर का दौरा करने के उनके उद्देश्य के बारे में पूछे जाने पर राहुल ने कहा कि वह जब राजनीति में आए थे तो उनके पास तजुर्बा नहीं था। इसलिए देश भर में घूम-घूमकर वह लोगों की समस्याओं को समझने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "सीखने की मेरी कोशिश मरते दम तक जारी रहेगी।"
गौरतलब है कि राहुल प्रदेश कांग्रेस की युवा शाखा और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) में कार्यकर्ताओं की भर्ती के सिलसिले में केरल के दौरे पर हैं।
हाल ही झारखंड और उड़ीसा में हुए नक्सली हमलों के बारे में राहुल ने कहा, "नक्सलवाद और स्थानीय सरकारों की लोगों तक पहुंच न बना पाने की विफलता के बीच संबंध है।"
संवाददाताओं से चर्चा के बाद राहुल ने कार्यकारी समिति की एक बैठक को संबोधित किया। इसके बाद वह युवाओं से बातचीत के लिए एक कॉलेज की ओर रुख कर गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications