हिंसा छोड़ वार्ता की राह चुने नक्सली : चिदम्बरम

चिदम्बरम ने बुधवार को यहां संवाददाताओं से चर्चा में नक्सलियों के खिलाफ जारी कार्रवाई को 'युद्ध' की संज्ञा देने से इंकार करते हुए कहा, "नक्सली हिंसा में विश्वास करते हैं। वे ही युद्ध और युद्ध की तैयारियों जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। हम इसे युद्ध नहीं मानते।"

उन्होंने कहा, "हम सभ्य समाज में रहते हैं। हम अपने ही लोगों के खिलाफ युद्ध नहीं छेड़ सकते। नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़ लोकतंत्र और विकास का रास्ता अख्तियार करना चाहिए।"

गृह मंत्री ने कहा कि उन्होंने नक्सल प्रभावित राज्यों से कहा है कि यदि नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़ते हैं तो वह उनके साथ विकास, उपेक्षा, गरीबी और सरकारी संरचना जैसे मुद्दों पर वार्ता करें।

उन्होंने कहा, "जब तक हिंसा नहीं रूकती तब तक विकास संभव नहीं है। लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। कोई भी सरकार जिसने संविधान की शपथ ली हो 'सशस्त्र मुक्ति संघर्ष' को स्वीकार नहीं कर सकती।"

चिदम्बरम ने कहा, "नक्सली इसी तरह बर्ताव करते रहें तो हमारे पास उनके खिलाफ कार्रवाई करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा। जब तक वे हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ते तब तक उनके खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई जारी रहेगी।"

गृह मंत्री ने कहा, "इस बात के सबूत नहीं है कि नक्सलियों को विदेशों से धन प्राप्त हो रहा है। वे देश में ही धन उगाही करने में सक्षम हैं। वे बैंकों को लूटते हैं, अपहरण कर फिरौती भी लेते हैं।"

गौर करने वाली बात है कि चिदम्बरम का यह बयान उस वक्त आया है जब मंगलवार को झारखंड में नक्सलियों ने फ्रांसिस इंदवार नाम के एक पुलिस इंस्पेक्टर को अगवा करने के बाद उनकी नृशंस हत्या कर दी थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+