मुजीब के हत्यारों को गुमराह किया गया
ढाका, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की वर्ष 1975 में एक सैन्य विद्रोह में हत्या करने वाले सैनिकों को सेना के एक अधिकारी ने यह कहकर गुमराह किया था कि देश में राजशाही घोषित होने वाली है और बांग्लादेश भारत के अधीन होगा।
वर्षो बाद हत्या के इस मामले और मौत की सजा पाए कुछ दोषियों की अपील की सुनवाई फिर शुरू करने वाले सर्वोच्च न्यायालय को बताया गया कि लेफ्टिनेंट कर्नल सैयद फारुक रहमान ने एक मजिस्ट्रेट के सामने यह बयान दिया था। बाद में रहमान को सेना से बर्खास्त कर दिया गया।
समाचार पत्र 'डेली स्टार' ने बुधवार को कहा कि पूर्व सैन्य अधिकारी ने बयान में स्वीकार किया था कि 14 अगस्त 1975 को उसने अपने साथियों को यह कहकर उत्तेजित किया कि 15 अगस्त को देश में राजशाही घोषित होने वाली है। इससे लोकतंत्र समाप्त हो जाएगा और देश भारत के अधीन हो जाएगा, इसलिए उन्हें शेख मुजीब की सरकार को नष्ट करना चाहिए।
इसके बाद 15 अगस्त 1975 की सुबह सेना के जवानों ने राष्ट्रपति के आवास पर हमला करके मुजीब और अन्य 28 लोगों की हत्या कर दी।
इस मामले में दोषी करार दिए गए दो अन्य ए.के.एम.मोहीउद्दीन और बाजलुल हुदा के वकील अब्दुल्ला अल-मामून ने कड़ी सुरक्षा के बीच आरंभ हुई सुनवाई के दूसरे दिन सर्वोच्च न्यायालय के सामने यह इकबालिया बयान पेश किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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