कुछ कांग्रेसी दिग्गजों के लिए विधानसभा की राह आसान नहीं
गत लोकसभा चुनाव में राज्य की 10 में से नौ सीटों पर कांग्रेस को सफलता मिली थी और राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 59 विधानसभा सीटों पर उसने बढ़त दर्ज की थी। पार्टी जिन कुछ विधानसभा क्षेत्रों में पिछड़ी थी, वहीं से कई कांग्रेसी दिग्गज इस विधानसभा चुनाव में हाथ आजमा रहे हैं।
ऐसी ही एक सीट है ऊंचना कलां। लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस 24,500 मतों से पिछड़ गई थी। मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा की सरकार में वित्त मंत्री वीरेंद्र सिंह यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला से है। चौटाला इसके अलावा एक अन्य सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं।
हिसार विधानसभा क्षेत्र में भी कांग्रेस पिछले लोकसभा चुनाव में पिछड़ गई थी। यहां कांग्रेस ने सावित्री जिंदल को अपना उम्मीदवार बनाया है। उनका मुकाबला हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) के उम्मीदवार से है। हजकां अध्यक्ष भजनलाल का यह गृह जिला है।
पिछले लोकसभा चुनाव में कालका विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस पीछे रह गई थी। पहले इस विधानसभा सीट का नेतृत्व विवादास्पद पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन करते रहे हैं। उन्हें इस बार कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया। पार्टी ने सतवीर राणा को यहां से उम्मीदवार बनाया है।
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष फूलचंद मुल्लाना के लिए भी जीत की राह आसान नहीं दिख रही है। वह मुल्लाना विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस इस सुरक्षित सीट पर तीसरे स्थान पर थी।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री मांगेराम गुप्ता जिंद से चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यहां 3300 मतों से पिछड़ी थी। ऊर्जा मंत्री रणदीप सिंह सूरजेवाला नरवाना से पिछली विधानसभा में जीतकर आए थे। कांग्रेस इस सीट पर पिछल्ले लोकसभा चुनाव में इनेलो से 15,000 मतों से पिछड़ गई थी। इस विधानसभा चुनाव में यह सीट सुरक्षित हो गई है। इसलिए सूरजेवाला कैथल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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