गांवों के दौरों को दलितों से जोड़े जाने से राहुल खफा
राहुल ने यहां संवाददाताओं से चर्चा में कहा, "मैं जब किसी के घर जाता हूं तो यह नहीं देखता कि वह उच्च जाति का है या फिर निचली जाति का। मैं सभी को इंसान के नजरिए से देखता हूं। मैं गरीबों के घर जाता हूं वह चाहे दलित हो या मुसलमान।"
उन्होंने कहा कि वह जब गांवों में गरीबों के घर जाते हैं मीडिया उसे दलितों से जोड़ कर प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा, "यह भेदभाव मीडिया करता है। मेरे मन में ऐसे भाव नहीं है। मैं निजी तौर जाति-पाति पर विश्वास नहीं करता। गरीबों और अमीरों के बीच मैं एक ही अंतर देख पाता हूं और वह है 'मौका'।"
राहुल ने कहा, "मेरे दौरों को दलित रंग देना मेरी नहीं बल्कि मीडिया की उपज है।"
राहुल ने उन आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जाता रहा है कि एंडरकडीशनर कमरों में बैठकर उनके जैसे युवा नेता गरीबों को खुद से जोड़ने की कोशिशें करते हैं।
उन्होंने कहा, "गरीब बुद्धिमान होते हैं लेकिन उन्हें मौका नहीं मिलता।"
गौरतलब है कि राहुल प्रदेश कांग्रेस की युवा शाखा और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) में कार्यकर्ताओं की भर्ती के सिलसिले में केरल के दौरे पर हैं।
हाल ही झारखंड और उड़ीसा में हुए नक्सली हमलों के बारे में राहुल ने कहा, "नक्सलवाद और स्थानीय सरकारों की लोगों तक पहुंच न पाने की क्षमता के बीच संबंध हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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