नक्सलियों ने अगवा पुलिस अधिकारी की हत्या की (लीड-2)
खुफिया विभाग के विशेष शाखा में कार्यरत फ्रांसिस को नक्सलियों ने पांच दिन पूर्व अगवा किया था। नक्सलियों ने फ्रांसिस की रिहाई की एवज में नक्सली नेता कोबद गांधी सहित तीन साथियों की रिहाई की मांग रखी थी।
चिदंबरम ने एक समाचार चैनल से कहा, "मैं इस घटना की निंदा करता हूं। ऐसी कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
रांची क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक आर.के.मलिक ने फ्रांसिस की हत्या की पुष्टि की है। प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने फ्रांसिस की हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए कहा, "पुलिस दमन के विरोध में फ्रांसिस की हत्या की गई।"
मलिक ने कहा, "रांची-जमशेदपुर राजमार्ग पर स्थित ताइमारा घाटी से फ्रांसिस का शव बरामद किया गया। शव की शिनाख्त के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया। नक्सलियों ने गला रेतकर उनकी हत्या की है।" उन्होंने इसे नक्सलियों का कायरतापूर्ण कृत्य करार दिया।
शनिवार को अपने आप को नक्सली नेता होने का दावा करने वाले समरजी ने फ्रांसिस की रिहाई के एवज में कुछ शर्ते रखी थी। स्थानीय समाचार पत्र ने इस संबंध में खबर प्रकाशित की थी, जिसमें कहा गया था, "फ्रांसिस नक्सलियों के कब्जे में हैं और सुरक्षित हैं और उन्हें उस समय छोड़ा जाएगा जब पुलिस नक्सली नेता कोबद गांधी, छत्रधर महतो और भूषण यादव को रिहा करेगी।"
समरजी के हवाले से समाचार पत्र ने कहा, "कुंदन पहान और अन्य लोगों के संबंधियों को प्रताड़ित नहीं किया जाए, अन्यथा हम सरकारी अधिकारियों के संबंधियों को अगवा कर लेंगे।"
पुलिस को संदेह है कि फ्रांसिस की हत्या के पीछे कुंदन पहान गुट का हाथ है। यह गुट रांची, खूटी और जमशेदपुर के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय है।
उल्लेखनीय है कि नक्सली नेता छत्रधर महतो को कोलकाता पुलिस की विशेष कार्रवाई दस्ते (एसटीएफ) ने गत 25 सितम्बर को गिरफ्तार किया था, वहीं लंदन में शिक्षा प्राप्त 63 वर्षीय कोबद गांधी को पुलिस ने गत 21 सितम्बर को गिरफ्तार किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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