संचार क्रांति के अग्रदूतों को मिला भौतिकी का नोबल (लीड-2)
पुरस्कार राशि का आधा हिस्सा ब्रिटिश और अमेरिकी नागरिक चार्ल्स के. काओ को दिया जाएगा। बाकी के आधे हिस्से को विलियर्ड एस. बोयले और जार्ज ई. स्मिथ के बीच बांटा जाएगा। बोयले कनाडाई व अमेरिकी नागरिक हैं जबकि स्मिथ अमेरिकी नागरिक हैं।
चार्ल्स को यह पुरस्कार ऑप्टिकल संचार के लिए फाइबर में प्रकाश के संचरण में शानदार उपलब्धि हासिल करने के लिए दिया गया है जबकि बोयले और स्मिथ को एक इमेजिंग सेमीकंडक्टर सर्किट 'सीसीडी सेंसर' के आविष्कार के लिए दिया जाएगा।
वर्ष 1933 में चीन के शंघाई में जन्मे चार्ल्स ने इंपीरियल कॉलेज, लंदन से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की उपाधि हासिल की। वह इंग्लैंड के हारलॉ में स्थित स्टैंडर्ड टेलीकम्युनिकेशंस लेबोरेट्रीज में इंजीनियरिंग विभाग के निदेशक रहे। वर्ष 1996 में वह हांगकांग विश्वविद्यालय के कुलपति पद से सेवानिवृत्त हुए।
कनाडियाई और अमेरिकी बोयले का जन्म कनाडा के अमहर्स्ट में 1924 में हुआ और उन्होंने कनाडा के मैकगिल विश्वविद्यालय से 1950 में भौतिकी में पीएचडी की उपाधि हासिल की। वह अमेरिका के ज्यू जर्सी में स्थित बेल लेबोरेट्रीज के कम्युनिकेशन साइंसेज डिविजन के कार्यकारी निदेशक रहे। उन्होंने वर्ष 1979 में अवकाश प्राप्त किया।
अमेरिका के न्यूयार्क में 1930 में जन्मे स्मिथ ने शिकागो विश्वविद्यालय से 1959 में भौतिकी में पीएचडी की उपाधि हासिल की। न्यू जर्सी के बेल लेबोरेट्रीज में वीएलसीआई डिवाइस विभाग के प्रमुख रहे स्मिथ ने वर्ष 1986 में अवकाश प्राप्त किया।
एकेडमी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि इस वर्ष के लिए भौतिकी का नोबल पुरस्कार उन दो आविष्कारों के लिए दिए जाने का फैसला किया गया है, जिसने वर्तमान में दुनिया को जोड़ने वाली संचार क्रांति का आधार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इन वैज्ञानिकों ने आम इंसान से जुड़े व्यावहारिक आविष्कार करने के साथ विज्ञान को नई चीजें उपलब्ध करवाई हैं।
वर्ष 1966 में चार्ल्स के. काओ ने ऑप्टिक ग्लास फाइबर के माध्यम से 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक प्रकाश का संचरण कराया, जो 1960 तक मुश्किल से 20 किलोमीटर तक जाता था। काओ के इस आविष्कार ने आने वाले समय के भौतिकशास्त्रियों को इस दिशा में और काम करने के प्रति उत्साहित किया और केवल चार वर्ष बाद 1970 में पूरी तरह से शुद्ध ऑप्टिकल फाइबर तैयार कर लिया गया।
आज के संचार युग के लिए ऑप्टिक फाइबर एक संचारी व्यवस्था है जिसके बिना इसकी कल्पना नहीं की जा सकती थी। इन फाइबरों के माध्यम से ही वैश्विक ब्रॉड बैंड यानी इंटरनेट की सुविधा मुहैया करवाई जा रही है।
इसके अलावा वर्ष 1969 में विलियम एस. बोयले और जार्ज ई. स्मिथ ने डिजिटल सेंसर 'सीसीडी' (चार्च-कपल्ड डिवाइस) का इस्तेमाल कर पहली इमेजिंग प्रौद्योगिकी का आविष्कार किया। सीसीडी प्रौद्योगिकी से फोटो इलेक्ट्रिक इफेक्ट तैयार किया गया जिस बारे में अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपना सिद्धांत दिया था। इसके लिए आइंस्टीन को वर्ष 1921 में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस इफेक्ट के माध्यम से प्रकाश का इलेक्ट्रिल सिग्नल के रूप में संचरण किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को गुणसूत्रों की रक्षा संबंधी महत्वपूर्ण खोज के लिए अमेरिका के तीन वैज्ञानिकों -एलिजाबेथ एच. ब्लैकबर्न, कैरोल डब्ल्यू. ग्रेडर और जैक डब्ल्यू. सोस्तैक- को चिकित्सा के क्षेत्र में वर्ष 2009 के नोबेल पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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