पानी की कमी से जूझ रहा है भिलाई इस्पात संयंत्र
संयंत्र के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "यह एक गंभीर संकट है। छत्तीसगढ़ सरकार ने सोमवार की शाम अपने गंगरेल बांध से 200 क्यूसेक पानी छोड़ा है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।"
यह संयंत्र रायपुर से 30 किलोमीटर दूर स्थित भिलाई में स्थापित है। यह सार्वजनिक क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी इस्पात इकाई है।
जल के भंडार में दो दिन की आपूर्ति के लायक ही पानी रह जाने पर संयंत्र के प्रबंधन ने राज्य सरकार से अधिक पानी छोड़े जाने के संबंध में बातचीत शुरू की थी।
उन्होंने कहा, "उत्पादन पर अब तक इसका कोई प्रभाव नहीं हुआ है, लेकिन यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है।"
सेल की इस इकाई में हमेशा 14 दिन के जल का भंडार रखा जाता है लेकिन इस मानसून में कम बारिश होने की वजह से संयंत्र के मरोदा स्थित जलाशय लगभग पूरी तरह सूख गए हैं।
पिछले वित्त वर्ष में संयंत्र ने रिकार्ड उत्पादन किया था। 2008-09 के दौरान यहां 54 लाख टन गर्म धातु, 52 लाख टन अपरिष्कृत इस्पात और 45 लाख टन बेचने योग्य इस्पात का उत्पादन हुआ था।
संयंत्र ने वर्ष 2009-10 के दौरान 58 लाख टन गर्म धातु का उत्पादन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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