विश्व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का अगुवा बन सकता है भारत : प्रधानमंत्री (लीड-2)

उन्होंने कहा, "मुझे इस क्षेत्र से जुड़ी कई खामियों का पता है। परंतु यदि हम एकजुट होकर कार्य कर सकें तो भारत विश्व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में अगुवा बन सकता है।"

एक बड़ा खाद्य उत्पादक देश होने के बावजूद उन्होंने भारत में प्रसंस्करण का स्तर नीचा होने पर निराशा जताई।

सिंह ने कहा कि विकसित देशों में खाद्य उत्पादन के 60-80 प्रतिशत प्रसंस्करण और अन्य एशियाई तथा लैटिन अमेरिकी देशों के 30 प्रतिशत प्रसंस्करण की तुलना में भारत में प्रसंस्करण का स्तर केवल छह प्रतिशत है।

राज्यों के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रियों की पहली बैठक का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नीति तभी असरदार होगी जब वह व्यापक होने के साथ साथ कई विधायी, प्रशासनिक तथा प्रोत्साहन के उपायों से युक्त हो।

प्रधानमंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए कर ढांचे को तर्कसंगत और सरल बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि जहां अधिकांश कृषि वस्तुएं करों के दायरे से बाहर हैं वहीं प्रसंस्करित खाद्य पदार्थो पर कई प्रकार के कर लगे हैं।

उन्होंने वित्तीय वर्ष 2008-09 के दौरान इस क्षेत्र में 14.7 प्रतिशत की विकास दर सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित लोगों को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग बिखरा हुआ है और इसमें अधिकांशत: छोटे और असंगठित खिलाड़ी हैं। छोटे उद्योगों को लाभदायक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा लायक बनने के लिए संगठित होने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रयास में बैंकों, वित्तीय संस्थाओं और तकनीकी तथा प्रबंधन संस्थानों के सहयोग से राज्य सरकारें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं और उन्हें यह भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्यों और सार्वजनिक तथा निजी उद्योग जगत से चर्चा के माध्यम से राष्ट्रीय नीति तैयार की जानी चाहिए। विभिन्न कृषि जलवायु और क्षेत्र पर आधारित लाभकारी कृषि व्यापार और कृषि उद्योग के विकास को बढ़ावा देना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान को निजी-सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से उद्योग का ज्ञान आधार बढ़ाने में केंद्रीय और सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

सिंह ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को उभरता क्षेत्र बताते हुए कहा कि यदि उसकी क्षमता के हिसाब से महत्व दिया गया तो इसमें ग्रामीण जीवन और रोजगार में सुधार तथा ग्रामीण तथा शहरी अंतर को पाटने और कृषि के तरीकों में सुधार की आश्चर्यजनक क्षमता है।

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय द्वारा आयोजित सम्मेलन में सभी राज्यों के मंत्री और अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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