दक्षिण भारत की बाढ़ जलवायु परिवर्तन का नतीजा : रेडक्रॉस
जयदीप गुप्ता
बैंकाक, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। रेडक्रॉस रेड क्रीसेंट क्लाइमेट सेंटर के प्रमुख मेडेलिन हेल्मर ने कहा है कि दक्षिण भारत में आई बाढ़ जलवायु परिवर्तन का नतीजा है। इस आपदा में अब तक कम से कम 350 लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों बेघर हो चुके हैं।
हेल्मर ने मंगलवार को आईएएनएस से बातचीत में कहा कि अत्यधिक सूखा और उसके बाद अत्यधिक बाढ़। यह इंटर गवर्नमेंटल पेनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की अंतिम रिपोर्ट के अनुरुप है।
वर्ष 2007 की इस रिपोर्ट में कहा गया था कि धरती के बढ़ते तापमान का प्रभाव मौसम पर पड़ेगा। मसलन सूखा, बाढ़ और आंधी-तूफान की मार अक्सर झेलनी पड़ सकती है।
हेल्मर ने कहा, "हमारे जैसी मानवीय सहायता एजेंसियों के साथ समस्या यही है कि हम आखिरकार तैयारी क्या करते हैं? पहले अत्यधिक सूखा और फिर अत्यधिक बाढ़। जलवायु परिवर्तन हमें आगाह कर रहा है कि हम अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं लेकिन हम इसके लिए तैयार नहीं हैं। हमें तैयार रहना पड़ेगा।"
अंतर्राष्ट्रीय गैरसरकारी संस्था 'वर्ल्ड विजन' के आपदा विभाग के निदेशक रिचर्ड रमसे ने कहा, "समस्या यह है कि जलवायु संबंधित इन आपदाओं के लिए दीर्घकालीन रणनीति बनाने की बजाए पूरा तंत्र अंशकालिक राहत में ही जुटा रहता है।"
'वर्ल्ड विजन' के ही ब्रेट पैरिस कहते हैं कि विकासशील देशों की यह मांग बिल्कुल वाजिब है कि औद्योगिक देशों को अपने ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन बहुत कम करना चाहिए जितना कि वे आज की तारीख में कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि भारत और कई अन्य विकासशील देशों ने औद्योगिक देशों से वर्ष 2020 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कम से कम 40 फीसदी कमी लाने की मांग की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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