बाढ़ से 20 लाख लोग प्रभावित, मनमोहन-सोनिया करेंगे दौरा (राउंडअप)
बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और गृह मंत्री पी. चिदंबरम बाढ़ प्रभावित आंध्र प्रदेश और कर्नाटक का सोमवार व मंगलवार को दौरा करेंगे। ये नेता भारी बारिश के कारण आई इस तबाही का आकलन करेंगे और प्रभावित लोगों से मुलाकात करेंगे।
पार्टी के एक प्रवक्ता ने रविवार को आईएएनएस को बताया, "सोनिया गांधी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित आंध्र प्रदेश के कुरनूल और महबूबनगर जिलों का हवाई सर्वेक्षण करेंगी और बाढ़ के कारण हुई तबाही का जायजा लेंगी।"
गांधी उत्तरी कर्नाटक के बाढ़ प्रभावित 10 जिलों में से एक बेल्लारी का भी दौरा करेंगी और लोगों से मुलाकात करेंगी। दोनों राज्यों के दौरे के दौरान गृह मंत्री चिदंबरम गांधी के साथ होंगे।
ज्ञात हो कि गांधी ने वर्ष 1999 में बेल्लारी से लोकसभा का चुनाव लड़ा था।
मनमोहन सिंह मंगलवार को दोनों राज्यों के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा ने मनमोहन सिंह से आग्रह किया है कि बाढ़ की इस विभीषिका को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए और राष्ट्रीय आपदा आपात कोष (एनएनसी) से 10,000 करोड़ रुपये जारी किए जाएं।
कर्नाटक में बाढ़ की चपेट में आकर मरने वालों की तादाद 170 हो गई है, वहीं आंध्र प्रदेश में बाढ़ से अब तक 33 लोगों की जानें गई हैं। लेकिन अनधिकृत रिपोर्टों के मुताबिक आंध्र प्रदेश में मरने वालों की संख्या 50 है।
कर्नाटक में 10 जिलों के सैकड़ों गांव और आंध प्रदेश में तीन शहरों के साथ ही 200 से अधिक गांव अब भी बाढ़ के चपेट में हैं।
कर्नाटक में सबसे ज्यादा प्रभावित 10 जिलों के विभिन्न इलाकों में राहत और पुनर्वास कार्य को और तेज कर दिया है, वहीं हजारों लोगों को राहत शिविरों में ले जाया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोले गए 598 पुनर्वास केंद्रों और राहत शिविरों में लगभग 177,500 लोगों ने शरण ले रखी है।
इस राज्य के उत्तरी जिलों में लोगों को तेज बारिश से राहत मिली है। राज्य में सबसे ज्यादा बाढ़ से प्रभावित जिलों में राहत कार्य और बचाव अभियान तेजी से चलाया जा रहा है।
राज्य के सूखा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव एच.वी.पाश्र्वनाथ ने आईएएनएस को बताया, "कर्नाटक के उत्तरी हिस्से में पिछले 12 घंटों में बारिश और बाढ़ से थोड़ी राहत मिली है, जबकि राज्य के तटीय और मध्य इलाकों में मूसलाधार बारिश जारी है।"
राज्य में शनिवार से बारिश में कमी देखी जा रही है वहीं बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी कम होना शुरू हो गया है। लेकिन बारिश और बाढ़ की वजह से सड़कें, पुल, और राजमार्गो के क्षतिग्रस्त होने से राहत कार्यो में बाधा आ रही है।
पाश्र्वनाथ ने कहा, "पिछले 12 घंटों में पानी से पूरी तरह जलमग्न हो चुके बीजापुर, बगलकोट, बेल्लारी, कोपाल, रायचुर और गुलबर्गा जिले के प्रभावित गांवों में खाद्य सामग्री के 20,000 पैकेट गिराए गए हैं।"
राज्य के मुख्यमंत्री बी.एस.येदियुरप्पा शुक्रवार से ही बाढ़ प्रभावित इलाकों का सड़क और हवाई सर्वेक्षण कर रहे हैं। बाढ़ की वजह से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है।
आंध्र प्रदेश में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। प्रदेश के तीन शहर और 200 से अधिक गांव अब भी बाढ़ के चपेट में हैं। कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों में जल का बहाव कुछ कम हुआ है लेकिन इससे पिछले तीन दिनों के दौरान भारी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित रहे दो जिलों कुरनूल और महबूबनगर के लोगों की तकलीफों का अंत नहीं हुआ है।
कोंदू नदी में अत्यधिक बहाव के कारण कुरनूल जिले के नांदयाल शहर के ज्यादातर इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। शहर में पांच से 10 फुट ऊंचाई तक पानी भर गया है। बाढ़ से बचने के लिए घरों की छतों पर पहुंचे लोगों को वहां से बाहर निकालने के लिए बचाव दल ने काम शुरू कर दिया है।
बंगाल की खाड़ी के ऊपर दबाव का क्षेत्र बनने की वजह से हुई भारी वर्षा से पांच जिलों के बाढ़ की चपेट में आने से 18 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, 400,000 लोग बेघर हो गए हैं और हजारों घर नष्ट हो गए हैं।
बाढ़ से खड़ी फसल, बुनियादी नागरिक सुविधाएं, बिजली व टेलीफोन की सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इससे सड़क व रेल यातायात भी प्रभावित हुआ है।
पिछले तीन दिनों से हजारों लोग बिना भोजन और शुद्ध जल के बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं। कुरनूल शहर में तीसरे दिन भी लोगों की बड़ी संख्या बाढ़ में फंसी रही। अधिकारियों ने अब तक शहर व आस-पास के इलाकों से करीब 100,000 लोगों को बाहर निकाला है।
आयुक्त (आपदा प्रबंधन) दिनेश कुमार का कहना है कि कुरनूल जिले में 15 व महबूबनगर में 13 लोग मारे गए हैं। अन्य मौतें नलगोंडा, गुंटूर और कृष्णा जिलों में हुई हैं।
श्रीसेलम बांध में जल का स्तर अब भी 10 फीट बना हुआ है जो कि इसकी क्षमता 885 फीट से अधिक है। मुख्यमंत्री के. रोसैया का कहना है कि बांध को कोई खतरा नहीं है। रोसैया ने कहा, "नागार्जुन सागर व प्रकाशम बांध को भी कोई खतरा नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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