धनी देश अपने वादा पूरा करें : मुखर्जी
अमेरिका के पीट्सबर्ग में हाल ही में जी-20 देशों के प्रमुखों की हुई बैठक में वैश्विक संस्थाओं में भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मतदान प्रतिशत को बढ़ाने का वादा किया गया था।
विश्व बैंक की विकास समिति की यहां हुई बैठक में वित्त मंत्री ने कहा, "पुनर्निर्माण की किसी भी कोशिश की प्राथमिक जरूर निश्चित तौर पर आर्थिक वजन को बढ़ाना है।" बैठक में दुनिया के प्रमुख आर्थिक नीति निर्माता और विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में अपने हिस्से से 10 अरब डॉलर ज्यादा राशि देने के वादे को दोहराते हुए मुखर्जी ने कहा कि बहुराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में मतदान के अधिकार को तय करने के लिए क्रय शक्ति की समानता सबसे महत्वपूर्ण कारक होना चाहिए।
करीब 12 खरब डॉलर की भारतीय अर्थव्यवस्था में 1.17 अरब की आबादी के कारण भले ही प्रति व्यक्ति आय कम हो लेकिन क्रय शक्ति के आधार पर यह दुनिया की पांच उभरती शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
मुखर्जी ने विश्व बैंक और आईएमएफ दोनों की पूंजी आधार को बढ़ाने का समर्थन किया, लेकिन किसी भी तरह की ढिलाई के प्रति सचेत करते हुए कहा कि अनिश्चितता के बादल अभी पूरी तरह से छंटे नहीं हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications