कारपोरेट अधिकारियों का वेतन बाजार निर्धारित करे: भारतीय कंपनियां
एक अग्रणी औद्योगिक लॉबी द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में भारतीय कंपनियों की यह राय सामने आई है।
एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया(एसोचैम) द्वारा 100 शीर्ष कारपोरेट मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के बीच कराए सर्वेक्षण के मुताबिक 60 फीसदी अधिकारियों का मानना था कि बेहतर प्रतिभाओं को सिर्फ वेतन नियमन के बिना ही आकर्षित किया जा सकता है।
सर्वेक्षण में कहा गया है, " एसोचैम मौजूदा संकट के समय कारपोरेट सेक्टर द्वारा मितव्ययिता अपनाने के पक्ष में है। लेकिन भारतीय कंपनियां इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं कि बेहतर प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए कारपारेट अधिकारियों का वेतन निर्धारित करने का काम बाजार करे।"
एसोचैम की यह टिप्पणी कंपनी मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय कंपनियों के प्रमुखों को मितव्ययिता अपनाते हुए अपने भारी भरकम वेतन पैकेज में कटौती कर देनी चाहिए।
एसोचैम के मुताबिक 60 फीसदी अधिकारियों का कहना था कि भारत के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती प्रमुख आर्थिक ताकत बनने की है। यह ऊंची आर्थिक विकास दर प्राप्त करके ही संभव हो सकता है।
एसौचैम ने सर्वेक्षण के आधार पर कहा," इसके लिए आवश्यक है कि कारपोरेट जगत में बेहतर प्रतिभाओं को रोजगार मिले जिनका वेतन विश्व के किसी भी कोने में मिलने वाले वेतन पैकेज के समतुल्य हो।"
एसोचैम के अनुसार 40 फीसदी अधिकारियों का यह भी मानना था कि कंपनियों के प्रमुखों को तड़क-भड़क और दिखावे से परहेज करते हुए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल विकास में तेजी लाने और रोजगार के अवसर सृजित करने में करना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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