फलों पर लेबल की जगह लग सकेगा टैटू
सुपर मार्केट में उपभोक्ता फलों पर 'लेजर ईचींग' तकनीक से बनाए गए 'टैटू' को देखकर उनकी पहचान कर सकेंगे।
'यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा' (यूएफएल) के पूर्व वैज्ञानिक ग्रेग ड्रोईलार्ड ने इस तकनीक का आविष्कार किया है।
अंगूर पर हमेशा कागज के चिकने लेबल लगाए जाते हैं जो फलों से व आपस चिपककर उन्हें खराब कर देते हैं। लेबल को अंगूर से निकालने पर वह खराब हो जाते हैं।
'सिट्रस एंड सब ट्रोपिकल प्रोडक्ट्स लैव, एग्रीकल्चर रिसर्च सर्विस (एआरएस)' के सूक्ष्मजीव विज्ञानी जेन नार्किसो और यूएफएल के शोधकर्ता एड एटेक्सबिरीआ ने कागज के चिपकने वाले लेबिल की जगह पर लेजर तकनीक के इस्तेमाल के लिए शोध किया है।
इस तकनीक से फलों से संबंधित जानकारी देने के लिए उनके छिलके की कुछ बाहरी कोशिकाओं में कार्बन डाई ऑक्साइड की लेजर किरणों से सूचना लिखी जाएगी। लेजर तकनीक से बने चिन्हों को निकाला, धोया या बदला नहीं जा सकेगा।
फलों पर लेजर तकनीक से बनने वाले स्थाई चिन्हों को मोम से ढ़ंक दिया जाए तो इनकी वजह से न तो फलों में पानी और न ही कीटाणु प्रवेश कर सकेंगे। आगे की जांच में पता चला है कि मोम भी लगाने की आवश्यकता नहीं होगी क्योंकि इस तकनीक के इस्तेमाल के दौरान बने सुराखों को कार्बन डाई ऑक्साइड से भर दिया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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