पड़ोसी देशों ने बाल मृत्यु के मिथकों को उजागर किया
एक स्वयंसेवी संगठन 'सेव द चिल्ड्रेन' द्वारा आस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका, भारत और ब्रिटेन सहित 14 देशों में कराए गए सर्वेक्षण में 13 देशों में गरीबी को बच्चों के जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा और ऊंची बाल मृत्यु दर का कारण बताया गया है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि हर वर्ष दुनिया भर में पांच वर्ष से कम आयु के 90 लाख बच्चों की मौत होती है। केवल भारत में हर वर्ष जन्म के 24 घंटे के भीतर 400,000 नवजात शिशुओं की मौत होती है।
सदी के विकास लक्ष्यों (एमडीजी) को हासिल करने के लिए वर्ष 2015 तक शिशु मृत्युदर घटाकर एक तिहाई करने की दिशा में जहां भारत ने अपर्याप्त प्रगति की है, वहीं इसी दौरान इस क्षेत्र में बांग्लादेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में वर्ष 1990 में शिशु मृत्यु दर 151 थी। वर्ष 2007 में वहां शिशु मृत्यु दर 61 हो गई। एमडीजी के अनुसार वर्ष 2015 तक शिशु मृत्यु दर को घटाकर 50 तक लाना है।
यहां तक की राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद नेपाल ने भी शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में सफलता हासिल की है। वर्ष 1990 के बाद से नेपाल में शिशु मृत्यु दर 50 प्रतिशत घटी है।
इस तुलना में पिछले 17 वर्षो में भारत पांच वर्ष से कम बच्चों की मृत्युदर को 117 से कम करके केवल 72 पर ला सका है। उसका एमडीजी लक्ष्य 38 है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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