जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही है बाल मृत्युदर : रिपोर्ट
अंतर्राष्ट्रीय गैरसरकारी संगठन 'सेव द चिल्ड्रेन' द्वारा किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि भारत और चीन में अध्ययन के दौरान जिन लोगों से इस बारे में सवाल किया गया उन लोगों ने इस तथ्य को स्वीकार किया है।
अंतर्राष्ट्रीय दान संगठन ने दुनिया में ऊंची बाल मृत्युदर के कारणों का पता लगाने के लिए 14 देशों को अध्ययन में शामिल किया।
अध्ययन में कहा गया है कि अकेले भारत में प्रतिवर्ष चार लाख बच्चे जन्म के 24 घंटे के अंदर मौत का शिकार हो जाते हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।
सोमवार को दुनिया भर में जारी की गई अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरी दुनिया में प्रतिवर्ष 90 लाख बच्चे पांच साल की उम्र से पहले मौत के शिकार हो जाते हैं। इसका मतलब हुआ हर तीन सेंकेड में एक बच्चे की मौत हो जाती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवाुय परिवर्तन दुनिया भर में 2.5 करोड़ लोगों को प्रभावित कर चुका है। इनमें से आधी संख्या बच्चों की है।
रिपोर्ट में कहा गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ आती है और तापमान बढ़ता है जिससे मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियां फैलती है। मलेरिया और डायरिया के ज्यादातर शिकार बच्चे ही होते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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