मुजीबुर रहमान हत्याकांड की सुनवाई 5 सदस्यीय खंडपीठ करेगी
समाचार एजेंसी स्टार ऑनलाइन ने खबर दी है कि मृत्युदंड की सजा पाए पांच पूर्व सैन्य कर्मियों की याचिकाओं पर सोमवार से सुनवाई शुरू होगी।
इस मामले का लंबा और विचित्र इतिहास है। यह मामला ही घटना के 21 वर्ष बाद तब दर्ज हो पाया था, जब प्रधानमंत्री शेख हसीना सत्ता में आईं थीं।
इस मामले की प्रगति बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही ऊपर-नीचे होती रही। इस घटना के तत्काल बाद किसी को भी मामला दर्ज कराने की अनुमति नहीं थी। वर्ष 1975 से 1990 तक बांग्लादेश में या तो सैन्य सरकार रही या फिर सेना समर्थित सरकार रही।
जब मुजीबुर रहमान की बेटी शेख हसीना सत्ता में आईं तो उन्होंने वर्ष 1996 में खांडकर मुस्ताक अहमद द्वारा नवंबर 1975 में बनाए गए कानून को समाप्त किया, तब जाकर इस मामले की सुनवाई का रास्ता साफ हो सका। उसके बाद 20 लोगों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
ढाका के सत्र न्यायाधीश गुलाम रसूल ने 8 नवंबर 1998 को 20 आरोपियों में से 15 के खिलाफ मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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