35 वर्ष से अधिक उम्र के सभी ग्रामीणों का मधुमेह परीक्षण चाहते हैं आजाद (लीड-1)
आजाद ने कहा है, "हमारे ऊपर मधुमेह का एक भारी बोझ है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में इस बीमारी के बारे में जागरूकता का अभाव है। हम 35 या 40 साल से अधिक उम्र के ग्रामीणों का मधुमेह परीक्षण कराने की योजना बना रहे हैं।"
आजाद ने कहा, "हम एक ऐसी योजना तैयार कर रहे हैं जिसके तहत जमीनी स्वास्थ्य कर्मियों के जरिए ग्रामीण आबादी के मुधमेह व रक्तचाप परीक्षण को अनिवार्य बनाया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा और उन्हें मधुमेह के परीक्षण के लिए एक निदान किट प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही मधुमेह नियंत्रण का एक कार्यक्रम भी लांच किया जा सकता है।"
सर गंगाराम अस्पताल द्वारा यहां दक्षिण एशिया में मधुमेह पर आयोजित सम्मेलन में बोलते हुए आजाद ने कहा, "मैंने इस योजना को लेकर अपने अधिकारियों के साथ कई बैठकें की है। हम इसके बारे में गंभीर हैं और यह मेरी खुद की पहल है।"
आजाद ने कहा, "25 से 30 करोड़ लोगों का ग्लूकोमीटर द्वारा परीक्षण करना एक कठिन काम होगा। इस काम में लगभग 1500 से 1600 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस खर्च को स्वास्थ्य मंत्रालय वहन नहीं कर सकता। इसलिए मैने स्वास्थ्य शोध विभाग से मधुमेह का परीक्षण करने के लिए ऐसा उपकरण विकसित करने को कहा है जिससे परीक्षण पर कम लागत आए।"
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "अगर हम असफल होते हैं तो हम कम लागत वाले उपकरण विकसित करने के लिए निजी फार्मा कंपनियों से गठजोड़ करने के लिए तैयार हैं। मैं यह सुनिश्चित करुं गा कि गांव के लोगों को यह सुविधा मिले।"
आजाद ने ने कहा कि ग्लूकोमीटर में इस्तेमाल की जाने वाली एक छड़ी की मौजूदा समय में कीमत 30 रुपये है। जबकि यह 5-6 रुपये से अधिक की नहीं होनी चाहिए।
आजाद ने रोग प्रतिरोधकता अभियान के आंकड़ों पर भी असंतोष जताया है। उन्होंने कहा है कि उनका मंत्रालय एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है जो सभी स्वास्थ्य अभियानों के आंकड़े सुरक्षित रखेगा।
आजाद ने कहा, " रोग प्रतिरक्षण अभियान का परिणाम संतोषजनक नहीं है। मैंने अपने अधिकारियों से पूछा कि उन्होंने ये आंकड़े कैसे इकट्ठा किए हैं। अधिकारी मेरे सवाल का संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। मैंने उनसे ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार कराने को कहा है जो सही आंकड़े हासिल करने में हमारी मदद कर सके।"
उन्होंने कहा, "ये सॉफ्टवेयर राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत सभी ब्लाकों को वितरित किए जाएंगे। ब्लाक स्तर पर एकत्र किए गए आंकड़े इन सॉफ्टवेयरों में सुरक्षित रहेंगे।"
आजाद ने कहा, "डाटाबेस में सभी बच्चों के नाम, उनके पिता के नाम और टेलीफोन नंबर होगा। अगर किसी का टेलीफोन नंबर नहीं है तो उसके पड़ोसी का टेलीफोन नंबर होगा। इससे प्रतिरक्षण अभियान की निगरानी बेहतर तरीके से हो सकेगी।"
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "इस साल के अंत तक आंकड़ों का डाटाबेस तैयार किया जा सकता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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