देश में शल्य चिकित्सा के मामलों में वृद्धि

दिल्ली स्थित एक अस्पताल में पिछले पांच वर्षो के दौरान शल्य चिकित्सा के मामलों में 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

सर गंगाराम अस्पताल में 'प्लास्टिक व कॉस्मेटिक सर्जरी' विभाग के वरिष्ठ सलाहकार राकेश खजांची का कहना है, "पिछले पांच वर्षो के दौरान नाक, होंठ, पुरुषों में सीने का आकार कम करने व उदर की शल्य चिकित्सा के मामलों में 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।"

'इंटरनेशनल कॉन्फेडरेशन फॉर प्लास्टिक रीकंस्ट्रक्टिव एंड एस्थीटिक सर्जरी' (आईपीआरएएस) के अध्यक्ष राजीव ए. आहूजा का कहना है, "दोस्तों के दबाव और शल्य चिकित्सा के बाद खूबसूरत दिखने का दावा करने वाले विज्ञापनों के चलते कई पुरुष और महिलाएं शल्य चिकित्सा करा रहे हैं।"

यद्यपि यह चिकित्सा उतनी आसान नहीं है जितना कि विज्ञापनों में दिखाया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अयोग्य चिकित्सकों से शल्य चिकित्सा कराने पर अत्यधिक रक्तस्राव, घाव का निशान बनने, तंत्रिका के नष्ट होने, त्वचा परिगलन और यहां तक कि चेहरे के पक्षाघात की समस्या हो सकती है।

आहूजा ने कहा, "शल्य चिकित्सा कराने वाले लोगों को मशविरे की आवश्यकता है। शल्य चिकित्सक को अक्सर एक मनोचिकित्सक की भूमिका भी निभाना पड़ती है।"

आगामी 3 दिसम्बर को राजधानी में आईपीआरएएस की 15वीं वर्ल्ड कांग्रेस होने जा रही है। जिसमें 97 देशों के शल्य क्रिया चिकित्सक शामिल होंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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