हिरासत में लिए गए विदेशियों को प्रत्यर्पित क्यों नहीं किया गया : न्यायालय (लीड-1)
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रत्यर्पण शिविरों में वर्षो से बगैर उचित हिरासत आदेश के हिरासत में रखे गए कई विदेशियों, खासतौर से पाकिस्तानियों की स्थिति पर चिंता जताते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा है कि आखिर इन लोगों को अब तक उनके देश क्यों नहीं भेजा गया।
अधिवक्ता अरविंद निगम ने मुख्य न्यायाधीश अजीत प्रकाश शाह और न्यायाधीश मनमोहन की खंडपीठ को बताया कि वर्ष 2006 से ही कई विदेशी नागरिक विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) के शिविरों में हैं। सरकार ने उन्हें वापस भेजने के लिए कोई प्रयास नहीं किया है।
निगम ने न्यायालय को बताया कि बिना हिरासत आदेश के कुछ लोगों को 2-3 वर्षो से हिरासत में रखा गया है। इन शिविरों में हिरासत में रखे गए लोगों की सही संख्या भी पता नहीं है।
सरकारी वकील जुबेदा बेगम ने कहा कि कुछ लोगों को सुरक्षा कारणों से हिरासत में रखा गया है।
इस पर न्यायालय ने कहा कि सरकार को उपयुक्त कानूनी आदेश के तहत लोगों को हिरासत में रखना चाहिए।
न्यायालय ने सरकारी वकील से भारत और पाकिस्तान के बीच कैदियों की अदला-बदली की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।
न्यायालय ने कहा कि राजनयिक संबंधों के अभाव के कारण लोगों की परेशानी के बारे में आंखें बंद नहीं की जा सकतीं।
अदालत ने सरकारी वकील से केंद्रीय गृह सचिव से संपर्क करने और अगली सुनवाई पर शिविरों में रहने वाले लोगों के बारे में विस्तृत शपथ पत्र पेश करने को कहा।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 11 बंदियों ने मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर प्रत्यर्पण शिविरों में सुविधाओं के खराब स्तर के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि शिविरों में पीने के पानी की कमी है और खाना भी घटिया दिया जाता है।
न्यायालय ने पत्र को एक जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया और कानूनी कार्रवाई आरंभ कर दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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