आंध्र के सैंकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में
कृष्णा और तुंगभद्र नदियों में जल का बहाव कुछ कम हुआ है लेकिन इससे पिछले तीन दिनों के दौरान भारी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित रहे दो जिलों कुरनूल और महबूबनगर के लोगों की तकलीफों का अंत नहीं हुआ है।
कोंदू नदी में अत्यधिक बहाव के कारण कुरनूल जिले के नंनदयाल शहर के ज्यादातर इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। शहर में पांच से 10 फुट ऊंचाई तक पानी भर गया है। बाढ़ से बचने के लिए घरों की छतों पर पहुंचे लोगों को यहां से बाहर निकालने के लिए बचाव दल ने काम शुरू कर दिया है।
बंगाल की खाड़ी के ऊपर दबाव का क्षेत्र बनने की वजह से हुई भारी वर्षा से पांच जिलों के बाढ़ की चपेट में आने से 18 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, 400,000 लोग बेघर हो गए हैं और हजारों घर नष्ट हो गए हैं।
बाढ़ से खड़ी फसल, बुनियादी नागरिक सुविधाएं, बिजली व टेलीफोन की सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इससे सड़क व रेल यातायात भी प्रभावित हुआ है।
पिछले तीन दिनों से हजारों लोग बिना भोजन और शुद्ध जल के बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं। कुरनूल शहर में तीसरे दिन भी लोगों की बड़ी संख्या बाढ़ में फंसी रही। अधिकारियों ने अब तक शहर व आस-पास के इलाकों से करीब 100,000 लोगों को बाहर निकाला है।
अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ से अब तक 33 लोगों की जानें गई हैं लेकिन अनधिकृत रिपोर्टों के मुताबिक मरने वालों की संख्या 50 है। आयुक्त (आपदा प्रबंधन) दिनेश कुमार का कहना है कि कुरनूल जिले में 15 व महबूबनगर में 13 लोग मारे गए हैं। अन्य मौतें नलगोंडा, गुंटूर और कृष्णा जिलों में हुई हैं।
श्रीसेलम बांध में जल का स्तर अब भी 10 फीट बना हुआ है जो कि इसकी क्षमता 885 फीट से अधिक है। मुख्यमंत्री के. रोसैया का कहना है कि बांध को कोई खतरा नहीं है।
रोसैया ने कहा, "नागार्जुन सागर व प्रकासम बांध को भी कोई खतरा नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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