कोपेनहेगेन समझौते की राह में भारत रोड़ा नहीं : रमेश

अरुण कुमार

वाशिंगटन, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। कोपेनहेगेन में होने वाले जलवायु परिवर्तन से संबद्ध संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में समझौते की राह में भारत के रोड़ा नहीं बनने का आश्वासन देते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने धनी देशों से इस मुद्दे पर कम 'उपदेशात्मक' और 'विवादास्पद' रवैया अपनाने को कहा है।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की साझेदारी से भारत-अमेरिका व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में रमेश ने कहा, "भारत जलवायु परिवर्तन का कारण नहीं है लेकिन हम निश्चित करना चाहते हैं कि हम समाधान का हिस्सा होंगे।"

ग्लोबल वार्मिग के लिए जिम्मेदार गैसों के उत्सर्जन में बाध्यकारी कटौती से भारत के इंकार के संबंध में रमेश ने कहा कि इस मुद्दे पर विकसित देशों को कम उपदेशात्मक होना चाहिए। इसके साथ ही विकासशील देशों को कम विवाद करना चाहिए।

उन्होंने कहा, "यदि हम रचनात्मकता भावना से हिस्सा लें तो कोपेनहेगेन में समझौता हो सकता है।"

रमेश ने पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी की साझेदारी और गरीब देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कोष की स्थापना जैसे एक समझौते पर जोर दिया।

जलवायु परिवर्तन पर भारत की कमजोर प्रतिबद्धता की धारणा को खारिज करते हुए रमेश ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए भारत द्वारा किए गए प्रयासों की लंबी सूची पेश की।

यूएसआईबीसी के अध्यक्ष रॉन सोमर्स ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धता में भारी निवेश और दुनिया की बेहतरीन प्रौद्योगिकी का उपयोग करना दोनों शामिल हैं। यह लक्ष्य निजी क्षेत्र को पूरी तरह से शामिल करके ही हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के लिए महत्वपूर्ण है कि वह स्वच्छ प्रौद्योगिकी के लिए स्थाई और तेजी से बढ़ता बाजार विकसित करे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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