'श्रीलंकाई शिविरों से तमिलों को रिहा किया जाए'
चार तमिल और एक मुस्लिम राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने एक संयुक्त बयान में श्रीलंका के उत्तरी हिस्से में शिविरों में तमिल नागरिकों की हिरासत को अवैध करार दिया है।
नेताओं ने कहा है कि इस हिरासत का कोई संवैधानिक आधार नहीं है और यह अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों का पूरी तरह उल्लंघन है।
बयान में कहा गया है, "इन लोगों को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए ताकि वे अपने घरों को वापस जा सकें और उन्हें बगैर किसी रुकावट के अपनी परंपरागत गतिविधियों को फिर से शुरू करने की अनुमति प्रदान की जाए।"
बयान में कहा गया है, "उन्हें अपने मित्रों और रिश्तेदारों के यहां भी जाने की अनुमति दी जाए और जिनके खिलाफ आपराधिक मामलों की संभावना हो उन्हें तत्काल किसी अदालत में पेश किया जाना चाहिए।"
ज्ञात हो कि महिलाओं और बच्चों सहित 280,000 तमिल नागरिकों को सरकारी शिविरों में रखा गया है।
यह बयान वी.आनंदसंगारी, मानू गणेशन, रउफ हकीम, के.विग्नेश्वरन और आर.संपतन की ओर से जारी किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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