क्वात्रोकी के खिलाफ अभियोग न्यायोचित नहीं : सीबीआई (लीड-2)
सीबीआई ने कहा कि पिछले वर्ष क्वात्रोकी के प्रत्यर्पण की कोशिश नकाम हो जाने के बाद उसके खिलाफ मामला नहीं चलाया जा सकता।
मुख्य महानगरीय दंडाधिकारी कावेरी बवेजा की अदालत के समक्ष अतिरिक्त महाधिवक्ता पी.पी. मल्होत्रा ने कहा, "क्वात्रोकी के प्रत्यर्पण की नाकाम कोशिश और अन्य कारकों को देखते हुए उसके खिलाफ अभियोग चलाना न्यायोचित नहीं है।"
वर्ष 1987 में एक स्वीडिश रेडियो स्टेशन ने कहा था कि बोफोर्स तोप सौदे में कांग्रेस पार्टी और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को रिश्वत के रूप में 64 करोड़ रुपये की राशि दी गई। इस रहस्योद्घाटन के बाद पूरा राष्ट्र अचंभित हो गया और दो साल बाद हुए चुनाव में कांग्रेस की भारी हार हुई।
दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 321 का हवाला देते हुए मल्होत्रा ने कहा कि जांच एजेंसी के आवेदन को केवल तभी खारिज किया जा सकता है जब अदालत को यह लगे कि सीबीआई ने बाहरी दबाव में अर्जी दाखिल की है या उसने जांच में अपना दिमाग नहीं लगाया है।
मल्होत्रा ने अपने नौ पृष्ठों की अर्जी में यह भी कहा है कि इस मामले के अन्य सभी आरोपी या तो मर चुके हैं या फिर दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया है।
उन्होंने कहा, "इसे न्यायपालिका के हित में समझा गया कि क्वोत्रोकी के खिलाफ सुनवाई जारी नहीं रहनी चाहिए और इसे खत्म किया जाना चाहिए।"
अदालत मामले से क्वात्रोकी का नाम हटाने संबंधी अर्जी पर नौ अक्टूबर को सुनवाई करेगी।
सीबीआई ने वकील अजय अग्रवाल की अपील का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को जांच एजेंसी की कानूनी राय पर सवाल खड़ा करने का कोई अधिकार नहीं है। अग्रवाल ने एक आवेदन दाखिल कर कहा कि क्वात्रोकी को गिरफ्त में लेने के लिए सरकार के पास पर्याप्त सबूत हैं।
निशुल्क कानूनी सहायता समिति के वकील सिर्धाथ गुप्ता ने सीबीआई द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 321 के तहत आवेदन करने पर सवाल उठाया। अदालत ने सीबीआई से अगली सुनवाई पर गुप्ता के आवेदन का जवाब देने को कहा।
कथित बाफोर्स घोटाले के एक मात्र जीवित संदिग्ध क्वात्रोकी को दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के परिवार का करीबी माना जाता रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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