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मृगतृष्णा बनता जा रहा है नेपाल का नया संविधान

सुदेशना सरकार

काठमांडू, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रमुख पार्टियों के बीच आपसी कलह के कारण नेपाल का नया संविधान मृगतृष्णा बनता जा रहा है। इस संविधान के मई 2010 में तैयार होने की संभावना है। इसके बाद ही शांति वार्ताएं स्थायी बन पाएंगी। वे शांति वार्ताएं, जिनके कारण 10 वर्षो तक चले उस हिंसा का अंत हुआ जिसमें 16,000 लोग मारे गए थे।

यद्यपि संविधान के लिए निर्धारित समय सीमा में मात्र सात महीने शेष बचे हैं, लेकिन संविधान लेखन की गति बुरी अवस्था में है। सरकार में शामिल प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनीफाइड मार्क्‍सिस्ट लेनिनिस्ट और पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला की नेपाली कांग्रेस (एनसी) का माओवादियों के साथ गहरा मतभेद है, जो कि संसद में सबसे बड़ी पार्टी है।

यह कलह मई महीने से शुरू है, जब माओवादी सरकार का पतन हुआ था। उसी समय से पूर्व विद्रोहियों ने एक तरह से संसद को जाम कर रखा है।

माओवादियों के उप प्रमुख और सांसद नारायण काजी श्रेष्ठ का कहना है, "राष्ट्रपति राम बरन यादव ने सेना प्रमुख को फिर से बहाल कर असंवैधानिक काम किया। जबकि सेना प्रमुख को निर्वाचित माओवादी सरकार द्वारा बर्खास्त किया गया था।"

राष्ट्रपति के हस्तक्षेप के कारण ही माओवादी प्रमुख पुष्प कमल दहाल प्रचंड की आठ महीना पुरानी सरकार गिर गई थी और तभी से माओवादी नए सत्ताधारी गठबंधन के खिलाफ बिगुल बजाए हुए हैं।

श्रेष्ठ ने आईएएनएस से कहा, "हमने राष्ट्रपति की भूमिका पर संसद में एक बहस की मांग की है लेकिन यूएमएल और एनसी की ओर से इसकी अनुमति नहीं दी जा रही है। जब तक बहस की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक हम संसद को नहीं चलने देंगे।"

माओवादियों का कहना है कि उनका विरोध राष्ट्रपति के खिलाफ है, जिन्होंने अपनी कार्रवाई के जरिए नेपाल में सैन्य शासन का रास्ता तैयार किया है, लेकिन वहीं पर सत्ताधारी पार्टियों का कहना है कि वे राष्ट्रपति के खिलाफ बहस की अनुमति नहीं देंगे, क्योंकि यह न्यायसंगत नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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