'दिल का दौरा रोकने में मछलियों का खास योगदान नहीं'

वर्ष 1990 में हुए इस अध्ययन में रोटरडैम के उपनगर में रहने वाले 55 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष व महिलाओं को शामिल किया गया था। जिसमें मछली खाने वाले व मछली न खाने वाले लोगों में दिल के दौरे के खतरे में कोई अंतर नहीं पाया गया।

नीदरलैंड के वेजिनिन्जेन विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ता मरीनी ग्लिन्जसे का कहना है, "वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि मछली खाने से दिल के दौरे की संभावना कम होती है। जबकि मछली के सेवन व दिल के दौरे में संबंध दर्शाने वाला कोई मजबूत सबूत नहीं है। एक अध्ययन में कहा गया है कि ऐसा हो सकता है। लेकिन पुराने डच लोगों पर किए गए हमारे अध्ययन में ऐसा नहीं पाया गया।"

वर्तमान में लोगों के अस्पताल में दाखिल होने का सबसे बड़ा कारण दिल का दौरा है।

यूरोप के करीब 3 करोड़ लोगों को दिल का दौरा पड़ता है और ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।

एक अध्ययन के मुताबिक 65 से 74 आयु के 35 में से एक व्यक्ति को व 85 से अधिक आयु के 7 में से एक व्यक्ति को यह समस्या होती है।

परीक्षण में 5,299 लोगों (इनमें से 41 प्रतिशत पुरुष थे। लोगों की माध्यमिक आयु 67.5 वर्ष थी) को शामिल किया गया था। इन लोगों में दिल के दौरे की समस्या नहीं थी। अध्ययनकर्ताओं को इनके खान-पान की जानकारी थी।

11 साल बाद परिणाम जांचने पर पाया गया कि 669 लोगों में दिल के दौरे की समस्या विकसित हो गई है। इन लोगों से उनके खान-पान व खासतौर पर भोजन में मछली के सेवन व उसके प्रकार के विषय में पूछा गया।

वेजिनिन्जेन विश्वविद्यालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक परिणामों से ज्ञात हुआ कि भोजन में मछली के सेवन और दिल के दौरे की घटनाओं में कोई महत्वपूर्ण संबंध नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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