ट्विटर पर थरूर की टिप्पणी ने छेड़ी बहस

एक आईटी पेशेवर सवीर मलिक ने अपने ब्लाग पर लिखा है, "गांधी जयंती या किसी नेता की जयंती या पुण्यतिथि पर अवकाश क्यों होना चाहिए। इस अवसर पर होने वाले हो-हल्ले में अवकाश का मकसद कहीं पीछे छूट जाता है। मेरे ज्यादातर दोस्त गांधी जयंती जैसे मौकों को नजदीकी हिल स्टेशन पर छुट्टी मनाने के अवसर में तब्दील कर लेते हैं।"

राधिका शर्मा का कहना है, "बहुत से लोगों के लिए गांधी जयंती का मौका एक लंबे सप्ताहांत के रूप में हाथ लगा जिसे उन्होंने छुट्टी के रूप में मनाया। सिवाय राजनीतिज्ञों के जो या तो राजघाट पर पंक्ति में खड़े रहे या टीवी पर भाषण दिया। यह निश्श्चित रूप से राष्ट्रपिता के प्रति सम्मान व्यक्त करने का तरीका नहीं है।"

थरूर ने शुक्रवार को लोकप्रिय नेटवर्किं ग साइट पर लिखा था, "गाधी जी कहते थे कि काम ही पूजा है और हम उनके जन्मदिन पर काम से दूर रह कर छुट्टी मनाते हैं।"

दिल्ली के एक स्कूल में शिक्षक उज्जवल दास कहते हैं, "गांधी जयंती के एक दिन पहले मैं छात्रों के साथ चर्चा करता हूं कि क्या गांधी जी के सिद्धांत आज भी प्रासांगकि हैं। यह बहुत अर्थपूर्ण है। "

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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