स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता के लिए कार रैली
कार रैली में कम से कम 60 सजी-धजी कारें शामिल हुईं। कारों के बाहर कार में बैठे व्यक्तियों के नाम और उनके रक्त समूह भी लिखे गए थे।
स्तन कैंसर की बीमारी के बाद ठीक हुई 60 महिलाएं इस कार रैली में शामिल हुईं। गांधी जयंती के अवसर पर शुरू हुई इस कार रैली में महिलाओं के साथ चिकित्सक, स्वास्थ्य एवं सामुदायिक कार्यकर्ता भी रवाना हुए।
'फोरम ऑफ ब्रेस्ट कैंसर प्रोटेक्शन' के संस्थापक अध्यक्ष रमेश सरीन ने कहा, "देश में हर साल करीब 100,000 महिलाएं स्तन कैंसर से पीड़ित होती हैं। जागरूकता के अभाव व रोग का देर से पता चल पाने की वजह से इनमें से 40,000 महिलाओं की मृत्यु हो जाती है। इस प्रयास के जरिए छोटे शहरों की महिलाओं में इस बीमारी के प्रति जागरूकता पैदा की जाएगी।"
दक्षिणी दिल्ली के साकेत से रैली के रवाना होने के बाद एम्स के वरिष्ठ चिकित्सक पी. के. जुल्का ने कहा, "इन प्रतिभागियों का मानना है कि जागरूकता से महिलाओं में होने वाली इस बीमारी को कुछ हद तक रोका जा सकता है। ये प्रतिभागी महिलाओं को कुछ ऐसे तरीके बताएंगे जिन्हें अपनाकर वह स्वयं स्तन कैंसर का पता लगा सकती हैं।"
सरीन ने कहा कि आगरा पहुंचने के बाद चिकित्सक स्थानीय स्वयं सेवी संगठनों की मदद से 10 शिविरों में मरीजों का इलाज करेंगे। उन्होंने कहा, "इलाज व जांच के लिए आगरा में कम से कम 10 शिविरों का आयोजन होगा। शिविरों में यहां से जाने वाले चिकित्सक अपनी निशुल्क सेवाएं देंगे।"
सरीन ने कहा कि इसके बाद मेरठ, मुरादाबाद, कानपुर और लखनऊ सहित अन्य शहरों में इस तरह की रैलियों का आयोजन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि देश में हर साल स्तन कैंसर से 40,000 महिलाओं की मौत होती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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