पीड़ितों को पहुंचाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने मांगे थे 45 लाख रुपये : मंत्री (लीड-1)
राज्य सरकार ने हालांकि रक्षा मंत्रालय की उस मांग को ठुकरा दिया और इसके बदले शवों को नई दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरू सहित विभिन्न स्थलों पर पहुंचाने के लिए एक निजी विमानन कंपनी से दो विमान किराए पर ले लिए। इस प्रक्रिया में सरकार को 25 लाख रुपये से भी कम खर्च करने पड़े हैं।
मंत्री ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, "हमने रक्षा मंत्रालय से आग्रह किया था कि पीड़ितों के शवों को देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाने के लिए सेना का एक विमान मुहैया कराया जाए। वहां से 45 लाख रुपये बतौर किराए के रूप में मांगा गया। वहां से यह भी कहा गया कि विमान का उपयोग नागरिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाएगा।"
मुख्यमंत्री वी.एस.अच्युतानंदन ने भी सेना का विमान न मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की है।
सूत्रों ने कहा कि अच्युतानंदन ने रक्षा मंत्री और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ए.के.एंटनी से इस मुद्दे पर बातचीत की थी।
मंत्री ने आईएएनएस से कहा, "मुख्यमंत्री और रक्षा मंत्री के बीच बातचीत के बाद हमारे मुख्य सचिव ने रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संपर्क किया। उन्होंने हमें सूचित किया कि इस काम में इस्तेमाल में लाया जाने वाला एक विमान चंडीगढ़ में है और उसे कोच्चि पहुंचने में आठ घंटे लगेंगे।"
मंत्री ने कहा, "उसके बाद हमने किंगफिशर एयरलाइंस से संपर्क किया और शवों को तथा जिंदा बचे लोगों को दो विमानों में भर कर देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाया गया। कंपनी ने 400,000 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से मांगा था और इस हिसाब से इस काम में 25 लाख रुपये से भी कम लागत आई।"
मंत्री ने कहा कि कोयम्बटूर में वायुसेना बेस के अधिकारी अपने एक विमान को मुहैया कराना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसके लिए नई दिल्ली स्थित मुख्यालय से मंजूरी नहीं मिल पाई।
ज्ञात हो कि इस दुर्घटना में मरने वालों में दिल्ली और तमिलनाडु के 12-12 लोग शामिल हैं। आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के पांच-पांच, जबकि कर्नाटक और केरल के तीन-तीन और मुंबई का एक व्यक्ति शामिल है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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