नक्सलियों के खिलाफ अपनी रणनीति को चुस्त कर रही है सरकार
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "नक्सलियों के ठिकानों के बारे में ठीक से जानकारी किए बिना उनके खिलाफ जमीन पर सुरक्षा बलों की तैनाती लाभदायक होने के बदले ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकती है।"
नक्सलियों को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए 30,000 से अधिक केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों को तैनात किए जाने की योजना है और पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान अर्धसैनिक प्रमुखों और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं।
लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान नक्सलियों ने दुस्साहसपूर्ण हमले किए हैं और पटना से लगभग 200 किलोमीटर दूर खगरिया जिले के अमौसी गांव में नक्सलियों की यह कार्रवाई बेहद क्रूर रही है। पांच बच्चों सहित 16 ग्रामीणों के हाथ-पांव बांध कर उन्हें गोलियों से भून डाला गया।
इस घटना के ठीक पहले सशस्त्र नक्सलियों ने सितंबर महीने में पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में स्थित मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एक कार्यालय पर धावा बोल कर 15 लोगों को मार डाला था। माना जाता है कि उनमें से ज्यादातार माकपा कार्यकर्ता थे।
लालगढ़ के मध्य स्थित माकपा के इस कार्यालय के पास कई घंटे तक हुई गोलीबारी के बावजूद कोई भी सुरक्षाकर्मी वहां नहीं पहुंच सका था।
एक अधिकारी ने कहा, "नक्सलियों के दूर-दूर तक विस्तृत इलाके हमारे काम को लगातार कठिन बना रहे हैं। इसलिए हम अपनी रणनीति को और चुस्त बनाएंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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