रेबीज-विरोधी दवा का चिकित्सकीय प्रयोग शुरू

इस प्रतिरक्षी को 'मोनोक्लोनल एंटीबॉडी' (एमएबी) कहते हैं। रेबीज वायरस को निष्क्रिय करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। 'मासबायलॉजी ऑफ मेसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी मेडीकल स्कूल' (एमबी-एमयूएमएस) द्वारा विकसित इस प्रतिरक्षी पर 'सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया' (एसआईआई) के साथ मिलकर प्रयोग किया जा रहा है।

प्रयोग की पहली अवस्था में मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल में 84 स्वस्थ व्यक्तियों को नई एमएबी की विभिन्न खुराकें दी जाएंगी। एमबी-एमयूएमएस के साथ काम कर रहे एसआईआई ने यह कार्यक्रम प्रायोजित किया है।

एसआईआई रेबीज टीके का मुख्य आपूर्तिकर्ता है।

एमयूएमएस की प्रोफेसर डोना एम्ब्रोसीनो के मुताबिक, "इस अध्ययन के लिए भारत उपयुक्त देश है क्योंकि यहां रेबीज की गंभीर समस्या है।"

मासबायलॉजिक्स की डेबोराह मोरलिन के मुताबिक, "भारत व अन्य विकासशील देशों के चिकित्सकों के पास रेबीज के केवल टीके हैं, जो कि इस बीमारी को रोकने के लिए काफी नहीं है। यदि नया प्रतिरक्षी असरकारक होता है तो लोगों का जीवन बचाने में यह असरकारक साबित हो सकता है।"

वैश्विक स्तर पर रेबीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर साल कम से कम एक करोड़ लोग रेबीज के जानवरों के संपर्क में आते हैं परिणामस्वरूप हर साल 55,000 लोगों की मृत्यु होती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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