'भारत और चीन का होगा अच्छा विकास'

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) ने कहा है कि एशिया की अर्थव्यवस्थाओं ने वैश्विक आर्थिक संकट का बेहतर ढंग से सामना किया है लेकिन अभी ये कहना मुश्किल है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी जल्दी पटरी पर आ जाएगी.

आईएमएफ़ ने अनुमान लगाया है कि 2010 में भारत की विकास दर क़रीब 6.4 प्रतिशत रहेगी जबकि चीन नौ प्रतिशत की दर से विकास करेगा और यही दोनों देश एशिया के वित्तीय विकास में मुख्य भूमिका निभाएंगे.

आईएमएफ के अनुसार चीन, भारत और इंडोनेशिया ही ऐसे देश रहे जिन पर वैश्विक आर्थिक संकट का गंभीर असर नहीं पड़ा है और इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं ने सात प्रतिशत से अधिक की विकास दर दर्ज़ की जिसने क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की बेहतरी में प्रमुख भूमिका निभाई.

गुरुवार को जारी अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में आईएमएफ ने कहा, ‘‘हाल में अर्थव्यवस्थाओं ने जिस तरह से वापसी की है वो कमाल की बात है. हालांकि अभी ये प्रश्न है कि क्या अभी स्थितियां बेहतर होती जाएंगी.’’

संगठन का कहना है कि एशिया की अर्थव्यवस्थाओं की यह वापसी उनकी वित्तीय नीतियों, वित्तीय बाज़ारों की अच्छी स्थिति के कारण हुई लेकिन इन सकारात्मक संकेतों के कारण यह कहना मुश्किल है कि बेहतर परिस्थितियां कब तक रहेंगी.

भारत में सितंबर महीने में कारखानों के उत्पादन और मंहगाई की दरों के आकड़े आए और देखा गया है कि उत्पादन भी बढ़ा है और साथ में मंहगाई दर भी.

आईएमएफ का कहना है कि संकट के मद्देनज़र बैंकों को 2009 और 2010 के लिए अधिक नकद रिज़र्व रखने पर बाध्य होना पडा है.

संगठन ने अमरीकी अर्थव्यवस्था के बारे में कहा है कि अगले साल यह 1.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी और इसके बाद इसमें 2.7 प्रतिशत की दर से गिरेगी.

यूरोज़ोन के बारे में भी आईएमएफ़ का कहना है कि यह इस साल 4.2 प्रतिशत की दर से सिकुड़ेगी जबकि 2010 में 0.3 प्रतिशत से बढ़ेगी.

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