चीन द्वारा कश्मीरियों को अलग वीजा देने से भारत चिंतित (लीड-1)
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। सीमा में घुसपैठ की खबरों के बाद चीन द्वारा हाल ही में जम्मू एवं कश्मीर राज्य के निवासियों को अलग वीजा देने की कार्रवाई से दोनों देशों के बीच अविश्वास पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।
जम्मू और कश्मीर को अलग दर्जा देने संबंधी खबर के खुलासे के एक दिन बाद विदेश मंत्रालय ने चीन सरकार से इस बारे में अपनी नाखुशी जताई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने कहा, "हमारा जाहिर नजरिया है कि भारतीय नागरिकों के साथ निवास या जातीयता के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। हमने इस संबंध में अपनी जायज चिंता से चीनी सरकार को अवगत करा दिया है।"
इस मामले को चीनी दूतावास और बीजिंग में विदेश मंत्रालय के सामने उठाया गया।
इस प्रकार की कार्रवाइयों के संबंध में पूछे जाने पर चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा, "ये सभी वैध वीजा हैं।"
सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि चीन के विदेश मंत्री यांग जेइची के 26-27 अक्टूबर के भारतीय दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा के इस मुद्दे को उठाने की संभावना है।
जेइची बेंगलुरू में होने वाली भारत, चीन और रूस के विदेशमंत्रियों की त्रिपक्षीय बैठक में हिस्सा लेने आएंगे।
चीनी दूतावास कुछ समय से जम्मू और कश्मीर राज्य के पासपोर्ट धारकों को उनके पासपोर्ट पर वीजा चिपकाने के बजाए अलग कागज पर वीजा दे रहा है। इससे पहले चीन ने अरूणाचल प्रदेश के निवासियों को पासपोर्ट पर नत्थी करने वाले वीजा दिए थे।
चीन के इस कदम से सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है क्योंकि पासपोर्ट पर लगे वीजा के बगैर पासपोर्ट धारकों की यात्रा के सही रिकार्ड का पता नहीं चलेगा।
इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज स्टडीज में चीनी मामलों की विशेषज्ञ मीरा सिन्हा भट्टाचार्य ने आईएएनएस से कहा, "यह सबसे अधिक परेशान करने वाला है। इससे भारत और चीन के बीच तनाव के नए स्तर का पता चलता है।"
उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच वर्ष 1965 के युद्ध के दौरान एक छोटी अवधि को छोड़कर चीन ने कभी कश्मीर मुद्दा नहीं उठाया।
उन्होंने कहा कि यदि चीन जम्मू एवं कश्मीर की विवादास्पद स्थिति का मुद्दा उठता है तो यह गंभीर चिंता की बात है। इससे आपसी विश्वास में कमी आएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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