वाम के समर्थन से सिलिगुड़ी में कांग्रेस का महापौर, ममता भड़कीं (लीड-1)
केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की सहयोगी तृणमूल ने अपने सहयोगी से अलग रास्ता अपनाकर नगर निगम में विपक्ष में बैठने का फैसला किया है।
वाम मोर्चे के समर्थन से कांग्रेस के सिलिगुड़ी स्थानीय निकाय में बहुमत हासिल कर नागरिक बोर्ड के गठन के थोड़ी देर बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कांग्रेस पर गठबंधन राजनीति के नियमों को तोड़ने का आरोप लगाया।
बनर्जी ने टेलीफोन पर स्टार आनंद न्यूज चैनल से कहा, "कांग्रेस ने सिलिगुड़ी की जनता के जनादेश का अपमान किया है, जिसने एक राजनीतिक विकल्प के लिए वोट दिया था। परंतु कांग्रेस ने विश्वास भंग किया है। हमारी पार्टी का इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख है और हम मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) तथा कांग्रेस के इस अपवित्र गठजोड़ की निंदा करते हैं।"
बनर्जी ने कहा कि वह आम आदमी के हितों के लिए काम करती रहेंगी। लोगों का अब भी मानना है कि केवल तृणमूल कांग्रेस ही राज्य में परिवर्तन ला सकती है। कांग्रेस और माकपा ने फिर सिद्ध कर दिया है कि वे एक साथ हैं।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने वाम मोर्चे के सहयोग से 32:15 के बहुमत से सिलिगुड़ी का महापौर का पद हासिल कर लिया। कांग्रेस और तृणमूल दोनों ही महापौर के पद पर दावा कर रहे थे। कांग्रेस की उम्मीदवार गायत्री दत्ता को महापौर निर्वाचित किया गया।
कांग्रेस के 15 और तृणमूल कांग्रेस के 14 पार्षद थे। परंतु तृणमूल का दावा था कि निर्दलीय पार्षद रंजन शील शर्मा के समर्थन से उसके पास भी 15 पार्षद हैं।
उधर माकपा नेता और राज्य के शहरी विकास और नगरपालिका संबंधी मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने कहा कि सिलिगुड़ी नगर निगम में कांग्रेस का समर्थन करना राजनीतिक फैसला नहीं है।
भट्टाचार्य ने कहा कि सिलिगुड़ी नगर निगम में नागरिक बोर्ड के गठन की अनिश्चितता को देखते हुए माकपा ने कांग्रेस के समर्थन का कदम उठाया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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