2010 में 3 फीसदी रहेगी वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर
अरुण कुमार
वाशिंगटन, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। सदी की सबसे भयंकर मंदी के दौर से उबर चुकी विश्व अर्थव्यवस्था 2010 में 3 फीसदी की दर से विकास करेगी।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की रिपोर्ट 'विश्व आर्थिक आकलन' अक्टूबर 2009 के मुताबिक वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास की यह दर मंदी से पहले की विकास दर की तुलना में कम है।
रिपोर्ट के मुताबिक विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं का विकास बेहद धीमी गति से होगा और वर्ष के अंत तक बेरोजगारी की दर में वृद्धि जारी रहेगी। 2009 में विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं में 3.5 फीसदी संकुचन हुआ था।
2009 की चौथी तिमाही से अर्थव्यवस्थाओं के पटरी पर लौटने के मजबूत संकेतों के बीच आईएमएफ का आकलन है कि विकसित देशों की वास्तविक जीडीपी में 1.75 फीसदी की दर से वृद्धि होगी।
वहीं चीन और भारत सहित अन्य उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की 2010 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 1.75 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रोत्साहन पैकजों और वैश्विक व्यापार व वित्तीय स्थिति में सुधार होने के कारण अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी मंदी से उबर कर तेजी से पटरी पर लौट रही हैं। हालांकि वहां विकास की रफ्तार बनी रहने को लेकर चिंता अब भी कायम है।
आईएमएफ रिपोर्ट के मुताबिक उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में सबसे बड़ा खतरा यह है कि सरकार जब वित्तीय और मौद्रिक समर्थन बंद कर देगी तो अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की रफ्तार मंद या बाधित न हो जाए। इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं के सामने यह खतरा भी है कि नीतिगत उपायों के असर को कहीं घरेलू मांग में वृद्धि न मान लिया जाए।
आईएमएएफ की रिपोर्ट में चेताया गया है कि विश्व अर्थव्यवस्था के सामने अभी भी तेल की बढ़ती कीमतें, स्वाइन फ्लू, राजनीतिक उठापटक और संरक्षणवाद जैसे खतरे मौजूद हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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